जोधपुर

सरकारी सिस्टम बना मां और बेटे के मिलन में बाधक

सडक़ पर हुआ था बालक का जन्म
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Mar 04, 2021
सरकारी सिस्टम बना मां और बेटे के मिलन में बाधक
सरकारी सिस्टम बना मां और बेटे के मिलन में बाधक

जोधपुर. मैंने ना मां को देखा है और ना मां का प्यार । दिल कहता है वो सख्त नहीं होगी पर शायद उसके पास मुझसे मिलने का वक्त नहीं है। ममता की देवी वो भोली है, प्यारी है, ना जाने कैसी होगी। मुझे नींद ना आए तो उसने कभी लोरी भी नहीं सुनाई है। मैंने तो आज तक उसकी तस्वीर भी नहीं देखी है। ये दास्तान है करीब तीन वर्षीय बालक की जिसकी मां जोधपुर के आंगणवा स्थित मानसिक विमंदित गृह में मौजूद है और खुद का लालन पोषण चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित नवजीवन संस्थान के लवकुश गृह में हो रहा है।

१७ जून २०१८ को सडक़ पर हुआ था बालक का जन्म
जून २०१८ में मानसिक विमंदित महिला संतोष का सुरक्षित प्रसव आबू स्थित सडक़ पर चलते कुछ युवाओं ने हिम्मत जुटाकर करवाया था। उन्होंने पास से गुजऱती हुई महिला से मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ तो आखिरकार युवाओं ने ही मानवीय आधार पर विमंदित महिला का प्रसव करवाया। घटना के बाद मन सोसायटी जोधपुर के महावीर कांकरिया व योगेश लोहिया आबू जाकर आवश्यक विधिक कार्रवाई की। चार दिन बाद उपखण्ड मजिस्ट्रेट सिरोही ने आदेश जारी कर संतोष को एमडीएम में प्रवेशित करने का आदेश दिया। बाल कल्याण समिति जोधपुर से महिला संतोष के ४ दिन के शिशु को लवकुश गृह में प्रवेशित कराया। आदेश में कहा गया कि पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर स्वयं का व अपने बच्चे की सार संभाल करने की स्थिति में नही होने तक नवजात शिशु के लालन पालन व सार संभाल बाल कल्याण समिति की ओर से की जाए। साथ ही विक्षिप्त महिला संतोष के स्वस्थ होने पर बच्चे की कस्टडी चाहने पर नियमानुसार बच्चे को सुपूर्द करने का आदेश दिया था।

अब तक पता लगाने में देरी क्यों
मानसिक विमंदित संतोष के हाथों पर खुदे टेटू में उसका नाम और साथ में चेनूसिंह लिखा है जिसके आधार पर उसके परिवार का पता लगाया जा सकता है लेकिन करीब ढाई साल से अधिक का वक्त गुजरने के बावजूद किसी अधिकारी ने कोई रूचि नहीं ली है।

मां बेटा अधिकारी
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ‘नालसा’ 2010 की योजना के तहत अशक्त व मानसिक अशक्त व्यक्तियों के मानवाधिकारों व मौलिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहित एवं रक्षित किया जाना विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अपेक्षित है। जिसके मां संतोष और उसका बेटा लाभ अधिकारी है। इनके परिवार की खोज करना और मां-बेटे को आपस में मिलाने की जिम्मेदारी भी बाल कल्याण समिति की है।
योगेश लोहिया, सचिव, मेंटल अपलिफ्टमेंट नीड सोसायटी ‘मन ’ जोधपुर

Published on:
04 Mar 2021 06:00 pm