
जोधपुर . काला कानून मामले में जस्टिस गोविंद माथुर की खंडपीठ में शुक्रवार को सुनवाई हुई। एजाज एहमद की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सोमवार तक जवाब पेश करने का अंतिम अवसर दिया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता नीलकमल बोहरा ने जोर देकर कहा कि आज ही कला कानून खत्म होना चाहिए। ताकि लोग सांस ले सके।
काला कानून मामले में सरकार ने फिर यू टर्न ले लिया। अचानक लंच समय मे एएजी ने जवाब पेश किया। इससे पहले जस्टिस गोविंद माथुर की खंडपीठ में एएजी ने जवाब तैयार नहीं होने की बात कहते हुए 22 नवम्बर तक का समय मांगा था। आज अंतिम सुनवाई होने की वजह से जस्टिस माथुर ने सुनवाई पूरी करते हुए मामले की अगली तिथि बाबत आदेश डिक्टेट करवाते हुए चैम्बर में चले गए थे। इसके बाद में उन्होंने जवाब पेश किया। जिसकी एक प्रति याचिकाकर्ता को भी दी गई है।
जवाब में मुख्य बात यही लिखी गयी है कि ऑर्डिनेंस की वजह से याचिकाकर्ता कहाँ प्रभावित होता है। यहां तक कि प्रेस की स्वतंत्रता का भी याची से कोई लेना देना नहीं है इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है। एक और बात ऑर्डिनेंस अभी कमेटी को दिया हुआ है और प्रोसिजरल अवस्था मे है। इसलिए भी याचिका गैर जरूरी है। राज्य सरकार ने ऑर्डिनेंस में केंद्र सरकार से अनुमति लेने व राष्ट्र पति से मंजूरी की बात कहते हुए केंद्र सरकार को पार्टी नहीं बनाया जाना याचिका की बड़ी खामी बताया है। उन्होंने अन्य सवालों के जवाब सुनवाई के दौरान देने का भी लिखा है।
अपराह्न विदाई में हुआ रेफरेंस
रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी सूचना के अनुसार जस्टिस गोविंद माथुर के इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरण की पूर्व संध्या पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ में अपराह्न ३.४५ बजे रेफरेंस आयोजित किया गया। राष्ट्रपति की ओर से जस्टिस माथुर का स्थानांतरण नोटिफिकेशन ८ नवंबर को ही जारी कर दिया गया था। जस्टिस माथुर १८ नवंबर को इलाहाबाद के लिए रवाना होंगे। वहां उनको २२ नवंबर को शपथ दिलाई जाएगी।
राजस्थान हाईकोर्ट में ११ वर्ष तक सुनवाई
१४ अप्रेल १९५९ को जन्मे जस्टिस माथुर ने उदयपुर व जोधपुर से बीए एलएलबी करने के बाद बतौर वकील राजस्थान बार कौंसिल में १२ सितंबर १९८३ को पंजीकरण कराया। उन्होंने वकालात के दौरान संवैधानिक, सर्विस व श्रमिक कानूनों से संबंधित मामलों में दक्षता प्राप्त की। उनका राजस्थान हाईकोर्ट में २ सितंबर २००४ को एलिवेशन हुआ। तब से लगातार मुख्यपीठ जोधपुर व जयपुर पीठ में महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई कर चुके हैं।
जस्टिस माथुर की खंडपीठ में एएनएम भंवरी के गायब होने के बाद उसके पति की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान उनकी प्रखर टिप्पणियों व गंभीरतापूर्वक जारी निर्देशों के बाद सरकार ने मामला सीबीआई को सौंपा। शहर के बिगडे़ यातातयात से संबंधित मामला हो, या प्राचीन जलाशयों व देवस्थान विभाग में व्याप्त आपाधापी का मामला। अशोक उद्यान की बदहाली का मुद्दा हो या एयरपोर्ट विस्तार, कनेक्टिविटी, बरसाती नालों, ट्रैफिक और ओवरब्रिजों से संबंधित मामला, प्रवासी पक्षी कुरजां का दर्द हो या सरकार द्वारा लोकतंत्रीय व्यवस्था में सैंध लगाने की कार्रवाई हो, एेसे मुद्दों में जस्टिस माथुर ने स्व प्रेरणा प्रसंज्ञान लेते हुए जनहित याचिकाएं दायर कर सरकार के नाम से समय-समय पर निर्देश जारी किए।