
पीपाड़सिटी (जोधपुर). पंचायत राज चुनावों की घोषणा के साथ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता सरपंच बनने के लिए ग्रामीणों को लुभाने लगे हैं। इसके साथ ही कई राज्य कर्मचारी और अधिकारी भी अपने परिजनों को गांव का मुखिया बनाने की जुगत में लग गए हैं।
पंचायत समिति क्षेत्र में पुनर्गठन के बाद ग्राम पंचायतों की संख्या 28 से 35 हो गई है। इनमें पचास प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित होने के कारण राज्य सेवा से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से अपनी पत्नी, पुत्री और मां के साथ नजदीकी रिश्तेदार महिला को चुनावी दंगल में उतारने की सक्रियता से गांवों की राजनीति सर्दी के मौसम में गर्माने लगी है।
वोटों का ध्रुवीकरण
पंचायत समिति क्षेत्र में अधिकांश अधिकारी, कर्मचारी आमजन से जुड़े राजस्व, शिक्षा, चिकित्सा, विद्युत, पंचायत राज, जलदाय, पुलिस जैसे विभागों में पदस्थापित होने के कारण सरपंच पद के लिए अपने परिजन और रिश्तेदारों के पक्ष में लॉबिंग करने से राज्य निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता की वैधानिकता पर भी सवालिया निशान लगा है।
कर्मचारी संगठनों की अहमियत बढ़ी
सरपंच के चुनाव में एक एक वोट का महत्व होने के कारण सरपंच पद के सम्भावित दावेदार कर्मचारी संगठनों के नेताओं को अपने पक्ष में लाकर जीत सुनिश्चित करने में सक्रिय हो गए हैं। वैसे सरपंच चुनाव गैर दलीय आधार पर पर होने के कारण कई अधिकारी, कर्मचारी भी ऐसी बैठकों में शामिल होकर साफा पहनने के साथ फूल-मालाओं से खुद को लदा होने पर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
महिला प्रत्याशी घर तक सीमित
कहने को पंचायत राज में महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण होने से सामान्य,एससी, ओबीसी में सीटें रिजर्व हैं। लेकिन इन पंचायतों में कुछ को छोडकऱ अधिकांश जगह इनकी भागीदारी नगण्य ही है। जनसम्पर्क हो या चयन प्रक्रिया सब जगह पुरुष ही निर्णय कर रहे हैं और खुद को पति, ससुर, जेठ, पुत्र होने के अधिकार के तहत सरपंच के रूप में पेश कर रहे हैं। ऐसे में इन महिला दावेदारों के नामांकन के दौरान ही मतदाताओं को दर्शन हो सकेंगे।
इन्होंने कहा
पंचायत चुनावों में कई राज्य कर्मचारियों, अधिकारियों की ओर से अपने परिजनों को चुनावी दंगल में उतार कर जनसंपर्क में सक्रिय होना आचार संहिता का खुला उल्लंघन और दोहरा लाभ लेने के समान हैं।
बाबूलाल लीलड़, पूर्व सरपंच
पंचायत राज चुनाव में किसी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी की ओर से जनसंपर्क, चुनावी सभाओं के साथ प्रत्याशी के लिए वोट मांगना, मतदाताओं को प्रभावित करना राज्य निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन की श्रेणी में मानते हुए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
- शैतानसिंह राजपुरोहित, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण पदाधिकारी, पंचायत चुनाव,पीपाड़सिटी