
जोधपुर।
गुड्स एण्ड सर्विस टेक्स (जीएसटी) के नए नियमों से जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक उलझन में फंस गए है। 1 जनवरी से लागू हुए जीएसटी के नए नियम 86 बी से हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक असमंजस की स्थिति में है । नए नियमों का प्रभाव जीएसटी रिफण्ड पर पड़ेगा, इससे अब जीएसटी रिफण्ड दो माह देरी से जारी होंगे। इससे उनकी करोड़ों रुपयों की वर्र्किंग मनी ब्लॉक हो जाएगी, जिसका असर हैण्डीक्राफ्ट उद्योग पर पड़ेगा। वहीं नए नियम के अनुसार 50 लाख रुपए से अधिक के मासिक कारोबार वाली इकाइयों को अनिवार्य रूप से एक प्रतिशत जीएसटी देनदारी का भुगतान नकद में करना होगा। सरकार ने यह कदम जाली बिल (इन्वॉयस) के जरिए कर चोरी रोकने के लिए उठाया गया है। केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) ने जीएसटी नियमों में नियम 86 बी पेश किया है, जो 1 जनवरी से लागू हो चुका है जिसका देश भर के उद्यमी विरोध कर रहे है ।
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हैण्डीक्राफ्ट इंडस्ट्री पर पड़ेगा नकारात्मक असर
जोधपुर की हैण्डीक्राफ्ट इंडस्ट्री सबसे ज्यादा राजस्व अर्जन कराने वाली इंडस्ट्री है। अब सरकार ने 50 लाख रुपए मासिक से अधिक के कर योग्य कारोबार पर इनपुट कर क्रेडिट के जरिए देनदारी के भुगतान को 99 प्रतिशत तक सीमित किया है। इससे जोधपुर के अधिकतर हैण्डीक्राफ्ट उद्यमियों को नुकसान होने की आशंका है ।
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करोड़ों का रिफण्ड अटका पड़ा है ‘रिस्की एक्सपोर्टर’ का
- कस्टम विभाग के अधीन डायरेक्टर जनरल ऑफ एनालिस्टिक एण्ड रिस्क मैनेजमेंट जीएसटी क्लेम कर रहे निर्यातकों के दस्तावेजों, जीएसटी भुगतान आदि की पूरी जांच करता है। कई बार सप्लायर द्वारा जीएसटी भुगतान नहीं करने पर भी उस निर्यातक को रिस्की एक्सपोर्टर की श्रेणी में डाल दिया जाता है। जोधपुर में ऐसे अनेक निर्यातक है, जिनके रिस्की एक्सपोर्टर की श्रेणी में होने के कारण करोड़ों का रिफण्ड अटका पड़ा है।
- निर्यातक द्वारा ऑनलाइन शिपिंग बिल में गलतियां हो जाने के कारण भी रिफण्ड देरी से होते है।
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नए नियम के अनुसार निर्यातकों को जीएसटी रिफ ण्ड देरी से होंगे, इससे निर्यातको की राशि 3 माह तक ब्लॉक हो जाएगी । केन्द्र सरकार से नियमों में सरलीकरण की मांग की है।
डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन