
जोधपुर.अपने परिचितों को बैंक ऋण दिलाने के दौरान जमानत दी, ऋणी ने बैंक को भुगतान नहीं करने पर बैंक ने जमानती से तकाजा किया, जमानती ने बैंक को चैक दिया जो अनादरित हो गया। बैंक ने कोर्ट में परिवाद पेश किया,कोर्ट ने जमानती को एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई। मामले के अनुसार जोधपुर नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड के अधिवक्ता जगत टाटिया ने कोर्ट में परिवाद पेश कर बताया कि मनीष तथा शशि नामक व्यक्तियों ने बैंक से दस लाख रुपए का मोरगेज लोन लिया। दोनों ऋणी का जमानती दलपतसिंह बना। लोन लेने वालों ने बैंक का लोन नहीं चुकाया,बैंक ने जमानती के दिए चेक को बैंक में लगाया जो रिटर्न हो गया।आरोपी की ओर से परीविक्षा का लाभ देने का निवेदन किया। अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट संख्या एक के पीठासीन अधिकारी डॉ अजयकुमार विश्नोई ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानती को एक वर्ष के कारावास तथा जुर्माने सजा सुनाई।
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शिक्षिका को दिया चेक रिटर्न हुआ,संस्था प्रधान को छह माह की सजा
जोधपुर. चेक अनावरण मामलों के लिए बनी स्पेशल कोर्ट एनआई एक्ट संख्या सात के पीठासीन अधिकारी डॉ रामचंद्र चौहान ने सात साल पुराने मामले का निस्तारण करते हुए निजी कोचिंग संस्थान के मालिक ने शिक्षिका के वेतन के पेटे दिए चेक के अनादरित होने पर छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। हर्षा सामरिया ने अधिवक्ता भुवनेश छंगाणी के मार्फत न्यायालय में परिवाद पेश कर बताया कि परिवादी सनसिटी अस्पताल पावटा स्थित एक निजी शिक्षण संस्थान में अध्यापन का कार्य करती थी,वेतन के बदले संस्था प्रधान श्यामसिंह ने बीस हज़ार का चेक दिया,बैंक में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित हो गया। कोर्ट ने संस्था प्रधान को छह माह की सजा तथा तीस हजार रुपये का जुर्माना देने का आदेश दिया।