
जोधपुर.
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग की ओर से शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के लेक्चर हॉल में 'आत्महत्या रोकथामÓ विषय पर सूचना परक एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्र एवं छात्राओं में जन जागृति एवं आत्महत्या के लक्षणों की पहचान, उसके रोकथाम के लिए जागरूकता को लेकर मनोचिकित्सकों ने जानकारियां दीं।
मुख्य अतिथि एसएनएमसी प्रिंसिपल डॉ. एस.एस. राठौड़ ने कहा कि आज का वातावरण तनावपूर्ण हो गया है, महाविद्यालय में आने वाले अधिकतर स्टूडेंट्स अन्य शहरों के होते है। सामंजस्य की समस्या, घर की याद आना, भावनात्मक रूप से कमजोर होना, शिक्षा का तनाव के कारण युवाओं मे आत्महत्या की प्रवृति बढऩा, अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के साथ ई युग हो गया है, जहां पर लोग अपना ज्यादातर समय फेसबुक वॉट्सअप जैसे साइटस पर काल्पनिक दोस्तों के साथ अधिक समय बिताते हैं। जरूरी है कि हम कोई न कोई सच्चा दोस्त या अभिभावक रखें ,जिससे हम अपनी छोटी-छोटी समस्याओं पर बात कर उनका निवारण कर सकें। मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ संजय गहलोत ने कहा कि आत्महत्या या खुदकुशी का संबंध प्राय: व्यक्ति की मनोदशा से संबंधित है। जिसमें व्यक्ति गंभीर तनाव या अवसाद की स्थिति में स्वयं की मृत्यु जानसमझकर करता है। यह तनाव से लडऩे का सामान्य तरीका नहीं होता है। परन्तु कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति अपने आपको असहाय और घोर निराशा में पाता है। आज आत्महत्या संसार में मृत्यु के प्रमुख कारणों में आता है।
एम्स ने ओपीडी में बांटे पर्चे
एम्स मनोरोग ओपीडी में शुक्रवार को आत्महत्या रोकथाम पर बनाए गए पर्चें बांटे गए। विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश नेभिनानी ने बताया कि जागरूकता के लिए पोस्टर लगाए गए। शनिवार को रेजिडेंट्स व नर्सिंग स्टूडेंट्स के लिए वर्कशॉप ओपीडी में आयोजित होगी। डॉ. प्रीति व डॉ. तनु गुप्ता ने आकाशवाणी जयपुर के माध्यम से आत्महत्या रोकथाम के प्रति अपना कार्यक्रम दिया।