
अगली सुनवाई में अनुसंधान अधिकारी तलब
जोधपुर
राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्रसिंह भाटी की एकलपीठ ने चूरू जिले के साण्डवा गांव में असम से खरीदकर लाई नाबालिग किशोरी के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में पुलिस के लचर अनुसंधान को लेकर गंभीर रुख अपनाते हुए अनुसंधान अधिकारी को 25 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में तलब करते हुए इस स्पष्टीकरण पेश करने को कहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि पुलिस नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार जैसे गंभीर अपराध में अनुसंधान के नाम पर औपचारिकता कर रही है। पुलिस ने अब तक केवल एक आरोपी गिरफ्तार किया है जबकि अपराध में और भी कई प्रभावशाली लोग शामिल हैं। पुलिस आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि उन्हें बचाने में जुटी है।
यह था मामला
नाबालिग ने रिपोर्ट में बताया कि साण्डवा निवासी राकेश कुमार उसे 10 साल पहले असम के लखीमपुर से यहां लाया। वह पत्नी के साथ मिलकर उसके साथ मारपीट व गलत काम करता रहता था। उसने कई बार पत्नी के सहयोग से बलात्कार किया और बेचने की धमकी दी।
नाबालिग ने साण्डवा पुलिस थाने में 9 सितम्बर को सामूहिक बलात्कार करने, बंधक बनाकर पीटने व गर्भपात कराने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया था। हालांकि मामला पुलिस तक पहुंचने से पहले गांव के मुखिया द्वारा बलात्कार करने वाले एवं गर्भपात करने वाले पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाकर मामला निपटा दिया था।
लेकिन गांव के युवाओं को मामले का पता चलने पर थाने के सामने प्रदर्शन कर मामला दर्ज करवाया। कोर्ट द्वारा नाबालिग की मेडिकल जांच कराने के बाद उसे बालिका गृह में भेज दिया गया।