जोधपुर

हाईकोर्ट ने फुटपाथ और सडक़ों से समयबद्ध अतिक्रमण हटाने के दिए निर्देश

किसी भी धर्म के पूजा स्थल निर्माण की अनुमति नहीं देने के निर्देश दिए
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Dec 19, 2020
हाईकोर्ट ने फुटपाथ और सडक़ों से समयबद्ध अतिक्रमण हटाने के दिए निर्देश
हाईकोर्ट ने फुटपाथ और सडक़ों से समयबद्ध अतिक्रमण हटाने के दिए निर्देश

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, जोधपुर विकास प्राधिकरण तथा नगर निगम उत्तर-दक्षिण को सडक़ों और फुटपाथों पर किसी तरह के नए निर्माण और किसी भी धर्म के पूजा स्थल निर्माण की अनुमति नहीं देने के निर्देश दिए हैं और दोनों निगमों के आयुक्तों को समन्वित समयबद्ध कार्य योजना पेश करने को कहा है।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता रवि लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि फुटपाथ और सार्वजनिक सडक़ें बड़े पैमाने पर लोगों की सुविधा के लिए हैं और किसी भी निजी व्यक्ति को उनका अनाधिकृत उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। राज्य सरकार तथा स्थानीय निकाय आम जनता के विश्वास के दायरे में हैं, इसलिए प्रत्येक नागरिक को फुटपाथों और सार्वजनिक रास्तों से गुजरने और उपयोग में लेने का अधिकार है। खंडपीठ ने कहा कि आम नागरिक ही नहीं बल्कि सरकार और स्थानीय निकायों को भी सडक़ों या फुटपाथ पर अवरोध पैदा करने का अधिकार नहीं है। फुटपाथों और सार्वजनिक रास्तों का हिस्सा बनने वाली भूमि का हर इंच संरक्षित और सावधानीपूर्वक बनाए रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि स्थानीय अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं कि किसी भी तरह से फुटपाथों और सार्वजनिक मार्ग की भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया जाए या उसका अनाधिकृत रूप से उपयोग नहीं किया जाए।

पक्षकार बनाने से इनकार
पिछली सुनवाई पर नगर निगम की ओर से कोर्ट को आश्वस्त किया गया था कि महेन्द्र नाथ अरोड़ा सर्किल से पीली टंकी तक जाने वाली सडक़ पर फुटपाथ पर मंदिर के नव निर्माण को हटा दिया जाएगा। इसे लेकर पीली टंकी के निकट रहने वाले अंबालाल ने कोर्ट में पक्षकार बनने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया, जिसमें बताया गया कि यहां वर्ष 1971 से मंदिर निर्मित है, जिसे अब सडक़ की चौड़ाई बढ़ाने के चलते कम क्षेत्रफल में नवनिर्मित किया जा रहा है। कोर्ट ने पाया कि निर्मित मंदिर फुटपाथ पर बना हुआ है और उसके स्वामित्व संबंधी कोई दावा नहीं किया गया है। इसके चलते पक्षकार के प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया गया।

दोनों निगम पेश करेंगे समयबद्ध समन्वित योजना
हाईकोर्ट ने दोनों निगमों को महेन्द्र लोढ़ा द्वारा दायर याचिका में दिए गए निर्देशों की पालना को लेकर समयबद््ध समन्वित योजना पेश करने को कहा है। उत्तर निगम के आयुक्त रोहिताश्व तोमर तथा दक्षिण निगम के आयुक्त डा.अमित यादव ने इसके लिए चार सप्ताह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कहा कि समन्वित योजना में सीढिय़ों, रैंप, केबिन, होर्डिंग्स या तारबंदी आदि के बहाने फुटपाथ और सार्वजनिक रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए समयबद्ध कार्य योजना को शामिल करना होगा। अधिकारियों को फुटपाथों पर किए गए किसी भी प्रकृति के धार्मिक ढांचे को हटाने या स्थानांतरित करने की योजना को भी शामिल करने को कहा गया है। अगली सुनवाई 18 जनवरी को मुकर्रर की गई है।

Published on:
19 Dec 2020 06:01 pm