जोधपुर

हाईकोर्ट ने पूछा, स्कूलों में शिक्षकों के कितने रिक्त पद भरे?

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश के सभी स्कूलों में शिक्षकों और व्याख्याताओं के रिक्त पद भरने के सम्बंध में पूर्व में दिए गए आदेश की पालना की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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Apr 27, 2019
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जोधपुर। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश के सभी स्कूलों में शिक्षकों और व्याख्याताओं के रिक्त पद भरने के सम्बंध में पूर्व में दिए गए आदेश की पालना की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने साथ ही जोधपुर जिले के फलौदी स्थित राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल में अगला शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से पहले सभी रिक्त पद भरने के निर्देश भी दिए है। इसके अलावा अगली सुनवाई 3 जुलाई से पहले सरकार को स्कूल में निर्धारित मानदंडों की तुलना में बुनियादी सुविधाओं की कमी की पहचान करने और आधारभूत सुविधाएं मुहैया करवाने की योजना भी प्रस्तुत करने को कहा है।

वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश दिनेश मेहता की खंडपीठ ने पप्पूलाल माली व ग्रामीणों की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद राज्य सरकार को निर्देश दिए कि जब तक फलौदी स्थित वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल में आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित नहीं हो जाता, तब तक अगले शैक्षणिक सत्र में स्कूल के लिए पर्याप्त स्थान व सुविधाओं से युक्त वैकल्पिक भवन की संभावना तलाशी जाए। हाईकोर्ट ने इससे पूर्व 21 अक्टूबर, 2013 को त्रिलोकसिंह प्रकरण में राज्य में शिक्षकों व व्याख्याताओं के रिक्त पद भरने के आदेश दिए थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट के ध्यान में लाया गया कि पूर्ववर्ती आदेश की पालना सुनिश्चित नहीं हो पाई है।

खंडपीठ ने कहा कि संविधान में शिक्षा एक मौलिक अधिकार है और यह हर राज्य की जिम्मेदारी है कि 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को अनिवार्य नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध करवाई जाए। सरकार के लिए यह बाध्यकारी है कि बेहतर शिक्षा के लिए स्कूल भवन, शिक्षण स्टाफ और सहित बुनियादी ढांचा मापदंडों के अनुरूप मुहैया करवाया जाए।

कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूर्व में जारी आदेशों की पालना सुनिश्चित नहीं हुई है, यह राज्य सरकार की अवहेलना को दर्शाता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के दृष्टिकोण की कमी के कारण स्कूलों में छात्र-शिक्षकों का अनुपात बिगड़ रहा है, जिससे बच्चों की शिक्षा में बाधा पहुंच रही है। न्यायाधीश लोढ़ा ने कहा कि सरकारी स्कूलों की हालत वाकई दयनीय है। शिक्षक ही नहीं, स्कूलों में पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं मसलन, क्लास रूम, बिजली, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, स्टाफ रूम, खेल का मैदान आदि की कमी है।

Updated on:
27 Apr 2019 03:02 pm
Published on:
27 Apr 2019 03:02 pm