
जोधपुर. जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविंद्रकुमार जोशी ने हाईकोर्ट में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में झूठा हलफऩामा पेश करने के आरोपी द्वारा पेश की गई अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। प्रकरण के अनुसार हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) नीरज भामू ने उदयमंदिर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि हाईकोर्ट खंडपीठ में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका संख्या 85/2019 में बलदेव कुमार को पूर्व में विवाहित होने अथवा नहीं होने बाबत हलफऩामा पेश करने का निर्देश दिया था, इस दौरान राज्य सरकार द्वारा 10 मई 2019 को उच्च न्यायालय में बलदेव कुमार के राशन कार्ड,भामाशाह कार्ड तथा स्कूल प्रमाण पत्र के आधार पर यह पाया कि बलदेव पूर्व में निरमा नामक महिला के साथ विवाहित है तथा उनका एक पुत्र भी है।
उच्च न्यायालय ने इसे गम्भीरता से लेते हुए बलदेव कुमार को झूठा हलफऩामा पेश करने तथा मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने का प्रथम दृष्टिया उत्तरदायी मानते हुए उसके खिलाफ अभियोजन के लिए उचित कार्यवाही के निर्देश दिए। उदयमंदिर पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420,467,468 तथा 471 के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया, इस बीच आरोपी की ओर से जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया कि उसके द्वारा मिथ्या हलफऩामा दिए जाने पर हाईकोर्ट द्वारा दस हजार रुपये की कॉस्ट लगा दी गई थी,जिसे जमा करवा दिया गया है साथ ही शपथ पत्र के संबंध में भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 340 के तहत कार्यवाही की जानी चाहिए, जबकि पुलिस ने आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया जो गलत है।लोक अभियोजक केशरसिंह नरूका ने जमानत का विरोध किया।
न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बाड़मेर जिले के सोनरी गांव निवासी बलदेव कुमार पुत्र मूलशंकर की ओर से पेश की गई अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।