
जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक बालिग युवती को करीब एक साल तक जोधपुर स्थित बालिका गृह (Girls House in Jodhpur) में रखने के लिए पाली की बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee of Pali) को जिम्मेदार ठहराया है।
कोर्ट ने कहा कि समिति किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile justice act) के अनुसार अपने वैध दायित्व निभाने में सक्षम नहीं है। ऐसा लगता है यह दुर्भावनापूर्ण तरीके से काम कर रही है। कोर्ट ने बाल कल्याण समिति अध्यक्ष दुर्गाराम आर्य और एक मात्र सदस्य सुदर्शन उदावत को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न उनको हटा दिया जाए और बालिग को अवैध कारावास में रखने के लिए मुआवजा देने के लिए कहा जाए।
न्यायाधीश संदीप मेहता और न्यायाधीश अभय चतुर्वेदी की खण्डपीठ ने बालिका गृह में निरुद्ध एक युवती की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आने पर राज्य सरकार से भी पूछा कि क्यों न याचिकाकर्ता को उचित मुआवजा देने का आदेश दिया जाए।
सोजतसिटी निवासी एक युवती ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर कहा था कि बालिग होने के बावजूद उसे इच्छा के विरुद्ध बालिका गृह में बंद रखा गया है।
दरअसल, युवती के पिता ने गत वर्ष 13 जुलाई को सोजत सिटी पुलिस थाने में दर्ज कराई गुमशुदगी रिपोर्ट में कहा था कि उसकी बेटी आधार कार्ड व शैक्षणिक दस्तावेज लेकर घर से चली गई है।
रिपोर्ट में युवती की उम्र 19 साल बताई गई। बाद में इसी लड़की के यौन शौषण के आरोप में प्रकाश नाम के युवक पर पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करवाया गया।
पिछले साल सितंबर में लड़की दस्तयाब हो गई। उसे बाल कल्याण समिति पाली के निर्देश पर बालिका गृह जोधपुर में निरुद्ध कर दिया गया।
बालिका गृह के अधिकारियों ने बालिका के पुनर्वास व कल्याण के लिए समिति को कई पत्र लिखे, लेकिन समिति ने कोई कदम नहीं उठाया।
एक साल से चिल्ला रही थी युवती, किसी ने नहीं सुनी
पॉक्सो एक्ट के मुकदमे में जब युवती को बयान के लिए बुलाया तो उसने खुद को बालिग बताया और कहा कि उसके साथ आरोपी प्रकाश ने कोई यौन शोषण नहीं किया।
कोर्ट ने पाया कि युवती पहले ही दिन से चिल्ला रही थी कि वह बालिग है, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी और बालिका गृह में भेज दिया। समिति ने करीब एक साल तक उसे अवैध कारावास में रखा।
स्कूल के रिकॉर्ड के अनुसार युवती की जन्मतिथि 25 अगस्त, 2000 है। हाईकोर्ट ने 8 अगस्त को पाली की बाल कल्याण समिति को उचित आदेश पारित करने के आदेश दिए थे।
समिति अध्यक्ष पर मिलीभगत का आरोप
कोर्ट में सुनवाई के दौरान समिति अध्यक्ष आर्य ने बताया कि समिति ने 19 अगस्त को युवती को बालिग मानते हुए उसे इच्छानुसार जाने की अनुमति दे दी।
लेकिन इस बीच पीडि़त युवती ने अध्यक्ष पर आरोप लगाया कि वह अशोककुमार नाम के व्यक्ति से मिले हुए हैं, जिससे शादी के लिए उसके माता-पिता दबाव डाल रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि समिति न केवल अक्षम साबित हुई, बल्कि उसकी कथित मिलीभगत ने उसे उचित आदेश पारित करने से रोके रखा। कोर्ट ने युवती को इच्छानुसार जाने की अनुमति देते हुए उसे पुलिस सुरक्षा देने को कहा है।