कलक्टर ने तहसीलदार को दिए पेड़ कटवाने के निर्देश
कुणाल पुरोहित/जोधपुर. भीतरी शहर के जूनी मंडी स्थित ह्यूसन राजकीय चिकित्सालय का संचालन जर्जर हालत में हो रहा है। चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। लंबे समय तक इसके निर्माण को लेकर फाइल सचिवालय में इधर-उधर घूमती रही। पिछले महीने 25 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति मिल गई, लेकिन इसका निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इसकी दो बड़ी वजह है। पहली तो चिकित्सालय में खड़ा पीपल का पेड़ और दूसरा अभी तक न तो नक्शा अप्रूव्ड हुआ न ही टैंडर प्रक्रिया। इसलिए इसके निर्माण कार्य के शुरू होने में देरी हो रही है। जबकि सूत्रों की मानें तो 21 मई को इसकी सचिवालय से 25 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी हो गई थी। पहले महामंदिर के लिए स्वीकृति मिली थी, लेकिन बाद में इसे स्थानांतरित कर ह्यूसन राजकीय चिकित्सालय में कर दिया गया।
यह है कारण
चिकित्सालय का निर्माण कार्य के अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इसके पीछे चिकित्सा विभाग का तर्क है कि मीटिंगों में व्यस्त होने के कारण वे इस पर ध्यान नहीं दे पाए। जबकि हकीकत यह है कि इस चिकित्सालय के लिए अभी तक टेंडर ही जारी नहीं हुए हैं।
महामंदिर के नाम से स्वीकृत, जूनी मंडी में लेंगे काम
दरअसल, 25 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति जूनी मंडी स्थित ह्यूसन राजकीय चिकित्सालय के लिए नहीं बल्कि महामंदिर चिकित्सालय के लिए आई थी। लेकिन वह किराए का भवन होने के कारण इस राशि को स्थानांतरित कर इसे ह्यूसन राजकीय चिकित्सालय में लगाने का निर्णय लिया गया।
पेड़ बना अड़चन, नक्शा भी अप्रूव्ड नहीं
वित्तीय स्वीकृति के बाद भी चिकित्सा विभाग निर्माण कार्य को लेकर ढिलाई बरत रहा है। न तो पेड़ कटवा पाया है और न ही निर्माण कार्य को लेकर नक्शा अप्रूव्ड हुआ है। जबकि एडीएम और सीएमएचओ के निरीक्षण के दौरान ही पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से पेड़ की समस्या को लेकर विचार विमर्श हो चुका था। सूत्रों की मानें तो चिकित्सा विभाग ने निर्माण कार्य के पहले पेड़ को कटवाने के लिए कलक्टर से बात की। इस पर कलक्टर ने तहसीलदार को इसके निर्देश दिए।नक्शा अपू्रव्ड होना बाकीअभी तक नक्शा अपू्रव्ड नहीं हुआ है। पेड़ की भी अड़चन आ रही है। हम चाहते हैं कि पेड़ सहमति से हट जाए। इसके लिए प्रशासन से बात करेंगे।
डॉ. एसएस चौधरी, सीएमएचओ, जोधपुर