Human Story: फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हर आंख नम थी और हर दिल गुस्से और दुख से भरा हुआ था। उन्हीं दिनों, करीब 19 फरवरी 2019 को आशा भोंसले एक कार्यक्रम के सिलसिले में जोधपुर पहुंची थीं। वहां मीडिया से बातचीत के दौरान उनका भावुक रूप सामने आया, जिसे देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।
Legendary Singer: जोधपुर. सुरों की मल्लिका आशा भोंसले अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी आवाज़ के साथ-साथ उनकी संवेदनाएं भी हमेशा यादों में जिंदा रहेंगी। वे केवल एक महान गायिका ही नहीं थीं, बल्कि देश की हर पीड़ा को अपने दिल में महसूस करने वाली एक सच्ची इंसान भी थीं।
फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हर आंख नम थी और हर दिल गुस्से और दुख से भरा हुआ था। उन्हीं दिनों, करीब 19 फरवरी 2019 को आशा भोंसले एक कार्यक्रम के सिलसिले में जोधपुर पहुंची थीं। वहां मीडिया से बातचीत के दौरान उनका भावुक रूप सामने आया, जिसे देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।
कंपित आवाज़ में उन्होंने कहा था, “बहुत दुखद है… हम यहां हंसते-खेलते हैं, लेकिन किसके भरोसे? वे जवान हमारी रक्षा के लिए अपनी जान दे रहे हैं और हम बेफिक्र जी रहे हैं…आती है।” उनकी आंखों में आंसू थे और शब्दों में देश के लिए गहरा दर्द।
उन्होंने आगे कहा, “मैं कुछ नहीं कर सकती, लेकिन अगर मैं जवान होती तो जरूर सेना में शामिल हो जाती।” यह सिर्फ एक बयान नहीं था, बल्कि एक कलाकार के दिल में बसे देशप्रेम और सैनिकों के प्रति सम्मान की सच्ची अभिव्यक्ति थी।
आज जब वे इस दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं, तब जोधपुर में कही गई उनकी ये बातें और भी ज्यादा मार्मिक लगती हैं। उनकी आवाज़ भले ही थम गई हो, लेकिन उनकी संवेदनाएं और देश के प्रति प्रेम हमेशा गूंजता रहेगा।
सुरों की मल्लिका आशा भोंसले का राजस्थान से गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव भी रहा। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने बीकानेर के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर के लिए डिंगल भाषा में भजन और भोग आरती गाई थी। करीब सात वर्ष पहले रिकॉर्ड किए गए इस विशेष एल्बम में उन्होंने कठिन मानी जाने वाली डिंगल भाषा को अपनी साधना से जीवंत कर दिया। मुंबई के पंचम दा स्टूडियो में रिकॉर्ड हुए इन भजनों के पीछे देशनोक के कैलाश बोथरा और नोखा के श्याम दैया का योगदान रहा। इस पहल ने आशा जी के भक्तिमय रूप को भी अमर बना दिया।