
Karni Mata Temple and Asha Bhosle - FILE PIC
सुरों की मल्लिका आशा भोंसले अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन राजस्थान की माटी और यहाँ की लोक आस्था के साथ उनका रिश्ता युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। बहुत कम लोग जानते हैं कि बॉलीवुड की 'कैबरे क्वीन' कही जाने वाली आशा भोंसले का एक रूप 'भक्तिमयी' भी था, जो सीधे राजस्थान के बीकानेर से जुड़ा था। आशा ताई ने विश्व प्रसिद्ध बीकानेर के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर के लिए डिंगल भाषा में विशेष भजनों और 'भोग आरती' को अपनी आवाज दी थी।
आशा भोंसले ने करीब 7 साल पहले राजस्थान की ऐतिहासिक और वीर रस प्रधान 'डिंगल भाषा' में एक वीडियो एल्बम के लिए गायन किया था। डिंगल भाषा अपने कठोर वर्णों और कर्कश प्रवाह के लिए जानी जाती है, जिसे गाना किसी भी गैर-राजस्थानी गायक के लिए बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन आशा जी ने अपनी साधना से इस भाषा के साथ ऐसा न्याय किया कि सुनने वाले भाव-विभोर हो गए।
डिंगल भाषा की प्रमुख विशेषताएं, जैसे 'ड' और 'ढ' वर्णों की प्रधानता और वीर काव्य शैली को उन्होंने बखूबी पकड़ा। डिंगल में ऐसा वीडियो एल्बम पहली बार बना था, जिसमें किसी बॉलीवुड हस्ती ने आवाज दी थी।
इन भजनों की रिकॉर्डिंग मुंबई के प्रसिद्ध 'पंचम दा स्टूडियो' में हुई थी। इस खास प्रोजेक्ट के पीछे राजस्थान के ही दो सपूतों का हाथ था- देशनोक निवासी कैलाश बोथरा और नोखा के श्याम दैया। इन दोनों के प्रयास से आशा ताई ने करणी माता की महिमा का बखान किया। इस एल्बम में संगीतकार सतीश देहरा थे, जबकि बीकानेर के गायक अजय सिंह ने आशा जी के साथ अपनी आवाज साझा की थी।
आशा भोंसले द्वारा गाए गए करणी माता के ये भजन और वीडियो आज भी यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। माँ करणी के भक्त जब इन भजनों को सुनते हैं, तो उन्हें यकीन नहीं होता कि एक बॉलीवुड सिंगर ने डिंगल भाषा के कठिन शब्दों का इतना शुद्ध उच्चारण किया है। उनके निधन के बाद आज ये भजन राजस्थान के हर घर में उनकी याद के रूप में गूंज रहे हैं।
डिंगल पश्चिमी राजस्थान (मारवाड़ी) की एक प्रमुख साहित्यिक शैली है। यह मुख्य रूप से चारण और भाट कवियों द्वारा रचित है।
Updated on:
12 Apr 2026 03:25 pm
Published on:
12 Apr 2026 03:25 pm
