
जोधपुर। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित करने के बावजूद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बाजरा, ज्वार, मक्का तथा कपास की खरीद नहीं करने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को दो सप्ताह में प्रत्युत्तर पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसमें विफल रहने पर राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव को 30 मार्च को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ में याचिकाकर्ता किसान वेलफेयर सोसायटी, पाली की ओर से अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित ने कहा कि कई बार मौका देने के बावजूद केंद्र और राज्य ने प्रत्युत्तर पेश नहीं किया है। याचिका के अनुसार केंद्र सरकार ने खरीफ वर्ष 2020-21 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद किए जाने के लिए फसलों को अधिसूचित किया था, लेकिन राज्य सरकार ने बंपर पैदावार के बावजूद बाजरा, ज्वार, मक्का तथा कपास की खरीद प्रारंभ नहीं की। जबकि ये फसलें समूचे राजस्थान में बहुतायत में उगाई जाती हैं। जिन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं, उनके स्थायी खरीद केंद्र भी स्थापित नहीं किए गए हैं। जबकि सरकार को पंचायत स्तर पर खरीद को सुगम बनाने के लिए स्थायी खरीद केंद्र स्थापित करने चाहिए। राज्य सरकार नेेकेवल मूंग, उड़द, सोयाबीन तथा मूंगफली की खरीद को हरी झंडी दी है। याचिका में राजस्थान पत्रिका में पिछले साल 5 दिसंबर को प्रकाशित समाचार बंपर बाजरे पर अब सियासी बाजीगरी का हवाला देते हुए कहा गया कि बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2150 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जबकि सरकारी खरीद नहीं होने से किसान मंडियों में 1300 रुपए प्रति क्विंटल पर उपज बेचने को मजबूर है।