
अविनाश केवलिया/जोधपुर. औपचारिक रूप से बजरी के खनन और कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। इसके बावजूद शहर में बजरी आसानी से मिल रही है। लेकिन शहर में बजरी की वजह से कोई काम रुका नहीं है। चाहे सरकारी हो या निजी निमार्ण कार्य, सभी के लिए बजरी उपलब्ध है। खुले में उड़ रहे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मखौल पर प्रशासन व सरकार भी मौन साधे हुए है। एेसे में अवैध खननकर्ता जमकर चांदी कूट रहे हैं। इन्हें रोकने वाला भी आखिर कौन है? बजरी कहां से आ रही है और किस भाव बिक रही है की पत्रिका ने जानी हकीकत...।
स्थान - सारण नगर ओवरब्रिज
पत्थर और कंकरी के ट्रैक्टर खड़े थे। वहां पहुंचते ही पूछा -यहां बजरी सप्लाई करने वाले खड़े रहते हैं ना?
सप्लायर - क्या काम है, क्या लाना है?
रिपोर्टर - बजरी लेनी है, नहीं है क्या कोई?
सप्लायर - बजरी लानी है, हो जाएगा। मैं ले आऊंगा।
रिपोर्टर - काम शुरू कर रहा हूं इसलिए दो-तीन ट्रॉली चाहिए।
सप्लायर - हां हो जाएगा, साइट कहां है?
रिपोर्टर - कितने लगेंगे?
सप्लायर - एक ट्रॉली के चार हजार लगेंगे, साइट बताओ आप।
रिपोर्टर - सिटी में लानी है।
सप्लायर - वहां बड़ा वाला डम्पर मंगवा लो।
रिपोर्टर - छोटी गली है, डम्पर नहीं आता।
(इतने में एक और सप्लायर आ गया)
दूसरा सप्लायर - हां, बजरी चाहिए मैं भिजवा दंूगा।
रिपोर्टर - सिटी का स्थान बताया।
दूसरा सप्लायर - यहां से दूर पड़ेगा, आप तो डम्पर ही मंगवा लो।
रिपोर्टर - डम्पर के कितने लगेंगे?
दूसरा सप्लायर - 15 हजार लगेंगे। एक डम्पर में चार ट्रॉली बजरी आती है।
रिपोर्टर - थोड़ा वाजिब लगाओ, कुछ ऊपर-नीचे करो।
दूसरा सप्लायर - इसमें कुछ ऊपर-नीचे नहीं, यही भाव लगेगा।
रिपोर्टर - माल कब आएगा?
दूसरा सप्लायर - रात के समय ही आएगा।
(तीसरा सप्लायर और आकर पूछताछ करने लगा)
रिपोर्टर- बजरी कहां से लाते हो?
सप्लायर - उससे आपको क्या, आप तो जगह बता देना। मेरा नम्बर ले जाओ। जब हो तो मुझे फोन कर देना।