
गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने बालू मिट्टी से एक और चमत्कार कर दिखाया है। बोझिल समझी जाने वाली रेगिस्तान की रेत से विश्व में पहली बार ऐसा सोलिड ल्यूब्रिकेंट बनाया है जो 1100 डिग्री तापमान तक नहीं पिघलेगा। वर्तमान में काम में आने वाले ल्यूब्रिकेंट केवल 400 डिग्री तापमान ही सहन कर पाते हैं। ऐसे में आइआइटी का नया ल्यूब्रिकेंट अंतरिक्ष में नई संभावनाओं के द्वार खोल देगा। अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्षा में भेजने और उसे वापस पृथ्वी पर लौटने में आसानी रहेगी। ऑटोमोबाइल, सीमेंट सहित अन्य कई औद्योगिक इकाइयों में इसका उपयोग होगा।
रेत को ऐसे फिसलने से रोका
विश्व में तरल और द्रव दो तरह के ल्यूब्रिकेंट होते हैं जो किन्हीं भी दो चीजों में घर्षण को कम करते हैं। बालू रेत का घर्षण गुणांक एक से अधिक होता है इसलिए रेत मुठ्ठी से फिसल जाती है। आइआइटी जोधपुर के रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. राकेश शर्मा और उनकी टीम ने रेत की अंदरुनी परतों के मध्य निकल ऑक्साइड के नैनो कण डाले, जिससे इसका घर्षण गुणांक घटकर 0.001 से लेकर 0.4 तक आ गया। यह प्रयोग रेत कणों के परमाण्विक स्तर पर किया गया। रेत का यह ल्यूबिक्रेशन -50 डिग्री से 1100 डिग्री का तापमान सहन कर सकता है।
वर्तमान ल्यूब्रिकेंट से वायु प्रदूषण
वर्तमान में मोल्बिडनम सल्फाइड से बना सोलिड ल्यूब्रिकेंट उपयोग किया जाता है जो 400 डिग्री तापमान पर विघटित होकर सल्फर डाई ऑक्साइड गैस छोड़ता है। ल्यूब्रिकेशन का असर खत्म होने के साथ इससे वायु प्रदूषण भी होता है।
- प्रो राकेश शर्मा, रसायन विज्ञान विभाग, आइआइटी जोधपुर