
क्षेत्र में पाए जाने वाले वाइपर (पड़) व कोबरा (काला सांप) इन दिनों अपने बिलों से बाहर निकलकर लोगों काट रहे है। जिसके चलते राजकीय चिकित्सालय में रोजना सर्प दंश के मामले सामने आ रहे हैं। सर्प दंश के मामलों में समय पर उपचार नहीं करवाने से पीडि़त को ज्यादा नुकसान हो सकता है तथा समय पर उपचार करवाने से खतरा टल जाता है। जुलाई माह में राजकीय चिकित्सालय में सर्प दंश के ५१ मामले सामने आए है। राजकीय चिकित्सालय में आए सर्प दंश के मामलों में ८० फीसदी मामले वाइपर व २० फीसदी मामले कोबरा के काटने के है।
अस्पताल में आए सर्प दंश के मामले-
राजकीय चिकित्सालय में जुलाई 1 को 2, 2 को 2, 3 को 2, 4 को 1, 5 को 1, 6 को 3, 7 को 2, 8 को 1, 9 को 3, 10 को 1, 12 को 4, 13 को 1, 14 को 4, 15 को 4, 16को ३, 20को 2,21को 1, 22 को 2, 23 को 2, 24 को 3, 26 को 1, 27 को 1, 28 को 1, 29 को 4, 30 को 2, 31 को 2, 1 अगस्त को 2, 2 को 2 सर्प दंश के मामले आए है।
वाइपर और कोबारा के आ रहे है मामले-
भारतवर्ष में जहरीले सांपों में मुख्यत: वाइपर, कोबरा व करेट तीन प्रकार के सांप पाए जाते हैं। जिनमें से वाइपर व कोबरा फलोदी क्षेत्र में है। ये सांप अत्यधिक गर्मी व सर्दी के मौसम को छोडक़र लगभग हर समय अपने बिलों से बाहर निकलते रहते हैं। साथ ही खेतों में बुवाई के दौरान सांप बाहर निकल जाते है।
उपचार में नहीं बरते लापरवाही-
राजकीय चिकित्सालय के चिकित्सकों का कहना है कि राजकीय चिकित्सालय में एंटी स्नेक वीनम की आपूर्ति सुचारू है तथा सर्प दंश के बाद घायल को तत्काल राजकीय चिकित्सालय लाकर उपचार करवाएं। सर्प दंश का उपचार करने के नाम पर चिकित्सकीय सलाह के बिना कहीं भी न जाएं। साथ ही सर्प दंश के बाद चीरा या उस जगह इंजेक्शन न लगाएं।
यूं होता है असर-
राजकीय चिकित्सालय फलोदी के हड्ी रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक अग्रवाल व नर्सिंगकर्मी पारसमल सोनी ने बताया कि वाइपर सांप के काटने के बाद इसका जहर मानव शरीर में खून का थक्का बनने की क्षमता कम कर देता है। जिससे शरीर के किसी भी हिस्से रक्तस्राव शुरू हो सकता है। वाइपर पीले-भूरे रंग का होता है तथा ५ सेमी से १ फीट तक लंबा होता है। इसी प्रकार कोबरा सांप काले रंग का होता है तथा कोबरा के काटने के बाद इसका जहर शरीर में प्रवेश कर तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है। साथ ही मरीज को सांस लेने तकलीफ होने लगती है। (निसं)
-------------