
भारत के ज्ञान को पूरे विश्व में मिलने लगी है मान्यता : शेखावत
तनावड़ा में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री का उद्बोधन
जोधपुर. केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत के ज्ञान को पूरे विश्व में मान्यता मिलने लगी है। विश्व जब सभ्य होने का प्रयास कर रहा था, तब भारत अपने ज्ञान के चरमोत्कर्ष पर था।
शनिवार को तनावाड़ा में कार्यक्रम में वैदिक वांग्मय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि माला में 108 मणियों के पीछे पूरा वैज्ञानिक तथ्य है। वैदिक वांग्मय में लिखा गया है कि इस सौरमंडल में कुल 108 ग्रह हैं। आधुनिक विज्ञान आधे ग्रह भी खोज नहीं पाया है, लेकिन सैकड़ों वर्ष पुरानी वैदिक वांग्मय में इसका लिखा होना हमारे ज्ञान को स्थापित करता है।
शेखावत ने कहा कि भारत में प्लांट आधारित औषधि उद्योग की असीम संभावनाएं हैं। यह चीन के एनिमल बेस्ट मेडिकल उद्योग को रिप्लेस कर सकता है। कोविड के बाद आयुष की दवाओं के बाजार की संभावना और जरूरत बढ़ी है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रिटायर्ड जज जे.डी. थानवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आयुर्वेद को अब विश्व के हर कोने में पहचान मिली है। आयुर्वेद भारत की महाशक्ति है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञ नारायण दास प्रजापति ने कहा कि आयुर्वेद पूरी तरह से विज्ञान सम्मत और प्रामाणिक है और इसके वैज्ञानिक पक्ष को उभारने के लिए कॉलेजों में महत्वपूर्ण शोध एवं अनुसंधान को महत्व देना होगा।
कार्यक्रम में एडिशनल एसपी चैन सिंह महेचा, डॉ. नितिन वाजेपयी, लूणचंद सिनावड़िया, एडवोकेट शंकरलाल, शशि कुमार प्रजापत, डॉ. इंदीवर भारद्वाज, पुरुषोत्तम हिसारिया, पीडी गुप्ता, मनीष खंडेलवाल बाबूलाल प्रजापति सहित अनेक लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन सुधांशु टॉक ने किया। कार्यक्रम का संयोजन विभा शर्मा और अनिरुद्ध ने किया। तरुण प्रजापति और संजीव प्रजापति ने सभी को आभार ज्ञापित किया।