
जोधपुर. भारतीय वायुसेना ने टिड्डी पर हवाई हमला करने के लिए स्वयं ही एयरबोर्न लॉकस्ट कंट्रोल सिस्टम (एएलसीएस) तैयार कर लिया है। इसे एमआई-17 हेलीकॉप्टर पर लगाया गया है। यह एक साथ 800 लीटर पेस्टीसाइड लेकर उड़ेगा। इसकी पहली टेस्टिंग गुरुवार को जोधपुर में होगी। चंडीगढ़ स्थित एयरफोर्स के रिपेयर डिपो में तैयार एएलसीएस लगा एमआई-17 हेलीकॉप्टर बुधवार को जोधपुर पहुंच गया।
एयरफोर्स स्टेशन के मुखिया एयर कोमोडोर फिलिप थॉमस के नेतृत्व में टिड्डी चेतावनी संगठन के अधिकारियों के साथ बैठक में गुरुवार सुबह 10 बजे एयरफोर्स स्टेशन के पास टिड्डी नियंत्रण टेस्टिंग का फैसला किया गया। हरी झंडी मिलते ही बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, बीकानेर सहित अन्य हिस्सों में एमआई-17 हेलीकॉप्टर हर रोज टिड्डी नियंत्रण करेगा।
फिलहाल केंद्र सरकार ने टिड्डी नियंत्रण के लिए निजी कंपनी का हेलीकॉप्टर बाड़मेर में लगाया है, लेकिन इसमें एक बार में केवल 250 लीटर इम्लीसीफाइड कंसंट्रेट पेस्टीसाइड आ सकता है। एमआई-17 हेलीकॉप्टर अधिक प्रभावी यूएलवी पेस्टीसाइड मैलाथियान का स्प्रे करेगा।
हेलीकॉप्टर के दोनों तरफ नोजल
हेलीकॉप्टर के दोनों ओर नोजल लगाए गए हैं। इनमें लगी इलेक्ट्रिक मोटर एयर प्रेशर से नोजल से पेस्टीसाइड स्प्रे करेगी। यह चालीस मिनट में ऑपरेशन खत्म कर देगा। एक फ्लाइट में 750 हेक्टेयर क्षेत्र कवर हो सकेगा।
ब्रिटेन की ना पर स्वीकारी चुनौती
केंद्र सरकार ने पांच महीने पहले ब्रिटेन की कंपनी को वायुसेना के 5 हेलीकॉप्टर के लिए स्प्रेयर किट का ऑर्डर दिया था, लेकिन ब्रिटिश कंपनी माइक्रोन ने लगभग 1 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले किट सितम्बर से पहले देने में हाथ खड़े कर दिए। इधर संयुक्त राष्ट्र संघ ने जुलाई-अगस्त में भारत में भयंकर टिड्डी हमले की चेतावनी दे रखी है। ऐसे में भारतीय वायुसेना ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए एयर ब्लास्टिंग तकनीक का उपयोग करते हुए स्प्रेयर तैयार कर लिया। हालांकि ब्रिटेन का स्प्रेयर ***** टेक्नोलॉजी पर काम करता है जिसका नोजल 5000 से 7000 आरपीएम पर घूमता हुआ स्प्रे करता है।