जोधपुर

लड़ाकू विमान सुखोई-30 पर लगेगा ‘देशी’ विरुपाक्ष रडार, राजस्थान के पश्चिमी बॉर्डर पर और ताकतवर बनेगी इंडियन एयरफोर्स

Sukhoi-30 MKI: भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआइ लड़ाकू विमान को जल्द स्वदेशी विरुपाक्ष एईएसए रडार से लैस किया जाएगा। इसका पहला उड़ान परीक्षण सफल रहा है और अब अगले चरण के परीक्षण की तैयारी शुरू हो गई है।
2 min read
Jul 08, 2026
Sukhoi-30 MKI
सुखोई-30 एमकेआइ लड़ाकू विमान। फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआइ को जल्द ही स्वदेशी 'विरुपाक्ष' एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (एईएसए) रडार से लैस किया जाएगा। हाल ही में इस रडार का पहला उड़ान परीक्षण (फर्स्ट फ्लाइट टेस्ट) सफल रहा है। अगले वर्ष इसे हॉकर-800 विमान पर वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद सुखोई-30 एमकेआइ पर इसका परीक्षण होगा।

यह अपग्रेड 'सुपर सुखोई' योजना के तहत किया जा रहा है, ताकि सुखोई बेड़े को वर्ष 2050 तक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान के रूप में उपयोग किया जा सके। एयरफोर्स के पास वर्तमान में करीब 250 सुखोई हैं। पश्चिमी सीमा के पास स्थित सबसे महत्वपूर्ण जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन के पास भी सुखोई की ही स्क्वाड्रन है। प्रथम चरण में 84 सुखोई विमानों को विरुपाक्ष रडार से अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर तैनात सुखोई प्रमुखता से अपग्रेड होंगे।

पहले चरण की परीक्षा सफल

विरुपाक्ष रडार का 'फर्स्ट लाइट' परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। यह किसी भी आधुनिक रडार के विकास का पहला महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसमें उसके सभी प्रमुख सिस्टम की कार्यक्षमता परखी जाती है। फिलहाल रडार के जमीनी परीक्षण जारी हैं। इनमें लक्ष्य पहचानने की क्षमता, सिग्नल प्रदर्शन और विभिन्न परिस्थितियों में इसकी प्रभावशीलता का आकलन किया जा रहा है।

अगले साल हॉकर-800 पर होगा परीक्षण

जमीनी परीक्षण पूरे होने के बाद अगले वर्ष हॉकर-800 विमान पर उड़ान परीक्षण किए जाएंगे। इस दौरान लंबी दूरी पर लक्ष्य पहचानने, एक साथ कई लक्ष्यों की ट्रैकिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी परिस्थितियों में इसकी क्षमता परखी जाएगी। इसके सफल रहने पर सुखोई-30 एमकेआइ में इसे लगाकर हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमले, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तथा नए मिशन सिस्टम के साथ इसके तालमेल का परीक्षण होगा।

पूरे कार्यक्रम को अंतिम मंजूरी तक पहुंचने में लगभग पांच वर्ष लग सकते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन-डीआरडीओ ने सुखोई-30 एमकेआइ विमान से लंबी दूरी के ग्लाइड बम गौरव का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। परीक्षणों में लगभग सौ किलोमीटर की दूरी तक सटीकता के साथ निशाना लगाया गया था।

सुखोई रडार अपग्रेड योजना एक नजर में

  • हाल ही में विरुपाक्ष रडार का पहला उड़ान परीक्षण सफल।
  • 2026 के अंत तक पहली प्री-प्रोडक्शन खेप तैयार होने की उम्मीद।
  • 2027 के मध्य में हॉकर-800 पर उड़ान परीक्षण।
  • 2028 में सुखोई-30 एमकेआइ पर परीक्षण शुरू होने की संभावना।
  • पहले चरण में 84 सुखोई विमानों का अपग्रेड।
  • नए रडार के साथ आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और नई एवियोनिक्स भी मिलेंगी।
Updated on:
08 Jul 2026 08:00 pm
Published on:
08 Jul 2026 07:59 pm