जोधपुर

Rajasthan: पत्रिका की खबर पर हाईकोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान, उदयपुर की झीलों की जल गुणवत्ता का आकलन करने के निर्देश

Rajasthan High Court: उदयपुर की झीलों और जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने अतिक्रमण और प्रदूषण रोकने के लिए सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं।

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Jun 08, 2026
rajasthan high court jodhpur
राजस्थान हाईकोर्ट। फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर जिले की झीलों, जलस्रोतों, नहरों, फीडर चैनलों और उनसे जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचारों का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी एवं न्यायाधीश रेखा बोराणा की अवकाशकालीन खंडपीठ ने राजस्थान पत्रिका के उदयपुर संस्करण में 25, 29 और 31 मई को प्रकाशित समाचारों तथा उनके साथ प्रकाशित तस्वीरों का संज्ञान लिया।

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कोर्ट ने कहा कि उदयपुर की झीलों का संरक्षण, उनकी भौगोलिक पहचान और प्रदूषण से सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि इन जलस्रोतों की पारिस्थितिकीय भूमिका और पर्यावरणीय संतुलन बना रहे। पीठ ने कहा कि उदयपुर की झीलों का तंत्र केवल अलग-अलग जलस्रोतों का समूह नहीं है, बल्कि यह आपस में जुड़ा हुआ एक पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसकी स्थिरता इसके फीडर चैनलों, प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली और कैचमेंट क्षेत्र पर निर्भर करती है।

विकास गतिविधियों का दबाव

कोर्ट ने कहा कि उदयपुर की पिछोला, फतेहसागर, स्वरूप सागर, रंग सागर, रूप सागर तालाब, दूध तलाई, गोवर्धन सागर, बड़ी झील सहित अन्य जलस्रोत एक समग्र झील नेटवर्क का निर्माण करते हैं। समाचारों में सामने आए तथ्यों के अनुसार कई स्थानों पर अतिक्रमण, सीमांकन को लेकर अस्पष्टता, सीवरेज और अपशिष्ट जल का प्रवाह तथा विकास गतिविधियों का दबाव इन जलस्रोतों पर बढ़ रहा है, जिससे उनकी पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

कोर्ट ने किसी भी झील, जलस्रोत, नहर, फीडर चैनल या कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण, भराव, निर्माण या सीमाओं में परिवर्तन पर रोक लगा दी है। साथ ही सभी जलस्रोतों में बिना उपचारित सीवरेज, औद्योगिक अपशिष्ट, नगरपालिका कचरा और निर्माण मलबे के प्रवाह को पूरी तरह रोकने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि जब तक कोई अन्य आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक संवेदनशील झीलों और जलस्रोतों की वर्तमान स्थिति यथावत रखी जाए। कोर्ट ने अधिवक्ता अविन छंगाणी, मुदित नागपाल तथा शुभम ओझा को न्याय मित्र नियुक्त करते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की है।

हाईकोर्ट के दिए दिशा-निर्देश

  • उदयपुर जिले की सभी झीलों, जलस्रोतों, नहरों, फीडर चैनलों और कैचमेंट क्षेत्रों का विस्तृत विवरण कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इसमें प्रमुख झीलों की भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रफल, स्वामित्व, पारिस्थितिकीय स्थिति और जल गुणवत्ता का रिकॉर्ड शामिल हो। साथ ही जलस्रोतों के सीमांकन, जीआईएस मैपिंग, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने तथा राजस्व अभिलेखों को अद्यतन करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • रूप सागर तालाब के सीमांकन से संबंधित लंबित कार्यवाही की स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत किया जाए। अतिक्रमण, अवैध निर्माण, भूमि उपयोग परिवर्तन और विकास गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों का विवरण तथा उन पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी देने को कहा गया है।
  • झीलों और जलस्रोतों में सीवरेज, अपशिष्ट जल, नगरपालिका कचरे तथा निर्माण मलबे के प्रवाह को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। फतेहसागर झील सहित अन्य संवेदनशील जलस्रोतों के आसपास चल रही विकास और व्यावसायिक परियोजनाओं के संबंध में पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों की जानकारी भी मांगी गई है।
  • मदार नहर और अन्य प्रमुख नहर प्रणालियों की स्थिति, रखरखाव तथा संरचनात्मक ऑडिट की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही जलस्रोतों से जुड़ी जैव विविधता, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और प्रवासी पक्षियों के आवासों पर किए गए अध्ययनों का विवरण भी उपलब्ध कराया जाए।
  • फीडर चैनलों, प्राकृतिक जल निकासी तंत्र और कैचमेंट क्षेत्रों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन संबंधी उपायों की जानकारी दी जाए। पिछले पांच वर्षों में झीलों और जलस्रोतों के संरक्षण पर खर्च की गई राशि तथा चल रही परियोजनाओं की स्थिति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाए।
  • सभी जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजना दाखिल करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित विभागों के बीच समन्वय तंत्र और अब तक किए गए संयुक्त प्रयासों का विवरण भी प्रस्तुत किया जाए।
  • राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी प्रमुख झीलों की जल गुणवत्ता और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
Published on:
08 Jun 2026 06:29 pm