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Jodhpur News: पत्रिका की खबर पर राजस्थान हाईकोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान, वेटलैंड की मांगी पूरी रिपोर्ट

Wetlands Conservation: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के वेटलैंड्स पर बढ़ते संकट को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचार पर स्वतः संज्ञान लिया है।
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जोधपुर

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Rakesh Mishra

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Updated: 7 Jun 2026, 3:03 PM IST

Rajasthan High Court

राजस्थान हाईकोर्ट। फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में वेटलैंड्स के संरक्षण, पहचान, अधिसूचना और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को लेकर राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि वेटलैंड्स का वैज्ञानिक संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि पारिस्थितिक संतुलन, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता की रक्षा हो सके। न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी एवं न्यायाधीश रेखा बोराणा की अवकाशकालीन खंडपीठ ने राजस्थान पत्रिका के 1 जून के अंक में ‘प्रदेश के वैटलैंड्स पर संकट’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार पर संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

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खंडपीठ ने माना कि राज्य में बड़ी संख्या में वेटलैंड्स मौजूद होने के बावजूद उनके संरक्षण और अधिसूचना की प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आ रही हैं। कोर्ट ने पारिस्थितिकी तंत्र में वेटलैंड्स की अहम भूमिका बताते हुए कहा कि ये प्राकृतिक संरचनाएं जल शुद्धिकरण, भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु संतुलन की अहम कड़ियां हैं। खंडपीठ ने कहा कि इनका संरक्षण सीधे तौर पर नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार और राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ा हुआ है। पत्रिका की खबर के तथ्यों के हवाले से कोर्ट ने कहा कि कई वेटलैंड्स पर अतिक्रमण, सीवरेज बहाव, औद्योगिक अपशिष्ट, कचरा डंपिंग और अनियंत्रित विकास गतिविधियों का दबाव बढ़ रहा है, जिससे उनकी पारिस्थितिकी संरचना प्रभावित हो रही है।

हाईकोर्ट के अहम दिशा-निर्देश

  • राजस्थान में वेटलैंड्स का जिले वार व्यापक सर्वे कर उनकी संख्या, स्थिति और भौगोलिक विवरण प्रस्तुत किया जाए।
  • सभी वेटलैंड्स की जीआइएस मैपिंग, डिजिटल इन्वेंट्री और सीमा निर्धारण सुनिश्चित करने की हिदायत।
  • अधिसूचित एवं गैर-अधिसूचित वेटलैंड्स की स्थिति और अधिसूचना न होने के कारणों का विस्तृत विवरण देने के आदेश।
  • अतिक्रमण, अवैध निर्माण, भूमि उपयोग परिवर्तन और प्रदूषण से प्रभावित वेटलैंड्स का पूरा ब्योरा तथा की गई कार्रवाई प्रस्तुत करने के निर्देश।
  • वेटलैंड्स में सीवरेज, औद्योगिक अपशिष्ट और कचरा डंपिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी जाए।
  • राज्य वेटलैंड आथॉरिटी की कार्यप्रणाली, बैठकों और निर्णयों का पूरा विवरण प्रस्तुत करना होगा।
  • पिछले पांच वर्षों में वेटलैंड संरक्षण पर खर्च राशि और चल रहे पुनर्स्थापन कार्यों की स्थिति रिपोर्ट देने को कहा।
  • सभी प्रमुख वेटलैंड्स और रामसर साइट्स की पारिस्थितिकी स्थिति, जल गुणवत्ता और जैव विविधता पर रिपोर्ट मांगी।
  • वेटलैंड संरक्षण के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश।
  • वेटलैंड संरक्षण से जुड़े सभी विभागों के बीच समन्वय व्यवस्था और जन-जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी भी बतानी होगी।

तत्काल अंतरिम उपाय अपनाने के निर्देश

  • किसी भी वेटलैंड में अतिक्रमण, भराव, निर्माण या सीमा परिवर्तन पर रोक लगाने के आदेश।
  • वेटलैंड्स में बिना उपचारित सीवरेज, औद्योगिक अपशिष्ट और कचरा प्रवाह पूरी तरह रोका जाए।
  • प्रमुख वेटलैंड्स और रामसर साइट्स का निरीक्षण कर उनकी पारिस्थितिकी स्थिति और जल गुणवत्ता रिपोर्ट देने को कहा।
  • प्रदूषण प्रभावित वेटलैंड्स की जल गुणवत्ता जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।
  • संवेदनशील वेटलैंड्स में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश, जब तक कोर्ट कोई और निर्देश जारी न करे।
  • अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों से प्रभावित वेटलैंड्स की पहचान कर पुनर्स्थापन कार्रवाई का विवरण देने के निर्देश।
  • प्रवासी पक्षियों और जैव विविधता से जुड़े आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रमुख वेटलैंड्स की जल गुणवत्ता और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन कर रिपोर्ट देने के निर्देश।