
राजस्थान हाईकोर्ट। फाइल फोटो- पत्रिका
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में वेटलैंड्स के संरक्षण, पहचान, अधिसूचना और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को लेकर राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि वेटलैंड्स का वैज्ञानिक संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि पारिस्थितिक संतुलन, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता की रक्षा हो सके। न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी एवं न्यायाधीश रेखा बोराणा की अवकाशकालीन खंडपीठ ने राजस्थान पत्रिका के 1 जून के अंक में ‘प्रदेश के वैटलैंड्स पर संकट’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार पर संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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खंडपीठ ने माना कि राज्य में बड़ी संख्या में वेटलैंड्स मौजूद होने के बावजूद उनके संरक्षण और अधिसूचना की प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आ रही हैं। कोर्ट ने पारिस्थितिकी तंत्र में वेटलैंड्स की अहम भूमिका बताते हुए कहा कि ये प्राकृतिक संरचनाएं जल शुद्धिकरण, भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु संतुलन की अहम कड़ियां हैं। खंडपीठ ने कहा कि इनका संरक्षण सीधे तौर पर नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार और राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ा हुआ है। पत्रिका की खबर के तथ्यों के हवाले से कोर्ट ने कहा कि कई वेटलैंड्स पर अतिक्रमण, सीवरेज बहाव, औद्योगिक अपशिष्ट, कचरा डंपिंग और अनियंत्रित विकास गतिविधियों का दबाव बढ़ रहा है, जिससे उनकी पारिस्थितिकी संरचना प्रभावित हो रही है।
Updated on:
7 Jun 2026, 3:03 PM IST
Published on:
7 Jun 2026, 3:03 PM IST
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