
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पाली जिले के आनंदपुर कालू गांव में सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हटाने को लेकर जिला स्तरीय पब्लिक लैंड प्रोटेक्शन सेल को प्रभावी भूमिका निभाने के निर्देश देते हुए एक याचिका का निस्तारण कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति तथा न्यायाधीश विनित कुमार माथुर ने कहा कि हाईकोर्ट के समक्ष चारागाह, ओरण, गोचर, जोहड़, तालाब, नदी, नदी का पेटा, सार्वजनिक रास्ते, श्मशान, कब्रिस्तान आदि पर अतिक्रमण को लेकर जनहित याचिका के रूप में बड़ी संख्या में याचिकाएं दायर की रही हैं। इसे देखते हुए जयपुर पीठ ने 30 जनवरी, 2019 को जगदीश प्रसाद मीणा मामले में मुख्य सचिव को प्रत्येक जिले में पब्लिक लैंड प्रोटेक्शन सेल गठित करने के निर्देश दिए थे। जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित इस सेल का मुख्य कार्य सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हटाने की शिकायत पर जांच के उपरांत उचित कदम उठाना है। कोर्ट ने कहा कि जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित इस सेल को लेकर नियमित अंतराल पर यह आम सूचना प्रसारित की जानी चाहिए, जिनमेंं सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण को लेकर शिकायत या प्रतिवेदन देने की राह बताई गई हो। ऐसी प्रत्येक शिकायत की जिला कलक्टर को उपखंड अधिकारी, तहसीलदार या नायब तहसीलदार से जांच करवानी चाहिए और शिकायत के तथ्य सही पाए जाने पर अतिक्रमण हटाने और अतिक्रमियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। शिकायत का कारण अभिलिखित करते हुए न केवल निस्तारण किया जाए, बल्कि उसकी सूचना शिकायतकर्ता को दी जाए। अतिरिक्त महाधिवक्ता रेखा बोराणा ने कहा कि राजस्व विभाग ने सभी जिलों में सेल के गठन के लिए 24 अप्रैल, 2019 को आदेश जारी कर दिए हैं और जिला स्तर पर यह सेल नियमित कार्य कर रही है।
इन समान निर्देशों के साथ कोर्ट ने आनंदपुर कालू गांव में खसरा संख्या 1705 तथा 1838 की सार्वजनिक भूमि पर किए गए अतिक्रमण हटाने को लेकर दायर याचिका निस्तारित कर दी। याचिकाकर्ता तुलछाराम व अन्य को संबंधित जिला कलक्टर के समक्ष प्रतिवेदन देने को कहा गया है, जिसमें अतिक्रमण करने वालों के नाम का उल्लेख होना जरूरी है। जिला कलक्टर को तीन महीने के भीतर प्रतिवेदन पर विधि सम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।