
जोधपुर
संभाग के सबसे बड़े मथुरादास माथुर माथुर अस्पताल में 72 घंटे तक जीवन से संघर्ष के बाद 27 फरवरी 2019 को दुनिया को अलविदा कह गई पोकरण क्षेत्र के सांकड़ा पंचायत समिति की प्रधान अमतुल्लाह मेहर - Amtullah Maher का समाज सेवा में भी बड़ा योगदान रहा। खास बात यह है कि अमतुल्लाह मेहर देश को महाशक्ति बनाने वाली परमाणु नगरी के वार्ड वार्ड-4 के ऐतिहासिक गांव खातोलाई, गोमट व उडाणिया से पंचायत समिति की चुनाव जीती और मेहर ने अपना पहली बार का वोट भी खुद के लिए ही दिया था। वोट का अधिकार पाने की उम्र में ही वह पंचायत चुनाव में सबसे अधिक 2332 मतों के अंतर से जीती और प्रधान की कुर्सी पर काबिज भी हुई। चूंकि पंचायत समिति में मेहर की तुलना मेंं अधिक पढ़ी-लिखी कोई महिला सदस्य नहीं थी, इसलिए मेहर को अपनी जीत के बाद प्रधान बनने का मौका मिला।
मेहर ने कुछ ही साल में अपने क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे पोकरण में अच्छी छवि के रूप में खुद को आगे बढ़ाया और समाज सेवा के कार्यों में आगे रही। मेहर की छवि हर आयु-वर्ग तक रही और सभी समाजों के लोगों से उनका विशेष जुड़ाव रहा। आपको बता दें कि कुछ समय पहले राजस्थान विधानसभा के हुए चुनाव में बिगड़े समीकरण के बावजूद पोकरण सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सालेह मोहम्मद की जीत में भी प्रधान मेहर का भी बड़ा योगदान माना गया। क्योंकि मेहर सोशल मीडिया पर भी खासी सक्रिय थीं और हर कार्यक्रम में खुद मौजूद रहकर लोगों के हर दुख: दर्द में सहभागी बनती रही। कुछ ही सालों में मेहर का नाम जनमानस में चढ़ गया और जननेत्री के रूप में पहचाना गया।
ऐसे खुली थी राजनीति में किस्मत--
आपको बता दें कि राजनीति के क्षेत्र में ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें प्रयासों के बावजूद अपनी मंजिल नहीं मिलती। लेकिन राजनीति क्षेत्र में अमतुल्लाह मेहर का नाम ऐसे ही पहचाना गया। मेहर की किस्मत में भी राजनीति के द्वार ऐसे ही खुल गए थे। पोकरण क्षेत्र के चाचा गांव निवासी 22 वर्षीय अमतुल्लाह मेहर के परिवार से कोई राजनीति में नहीं रहा। लेकिन गत पंचायतराज चुनाव में कांग्रेस ने मेहर को पंचायत सदस्य की सामान्य सीट के वार्ड-4 (खातोलाई, गोमट व उडाणिया) से टिकट देकर चुनाव में उतारा। चूंकि मेहर एमए अंग्रेजी पढ़ी-लिखी थी, इसलिए कांग्रेस ने उसे मौका दे दिया। मेहर ने इससे पहले तक कभी वोट नहीं दिया। उसने पहली बार खुद के लिए ही वोट दिया और चुनाव जीत गईं। क्षेत्र में पंचायत समिति के सदस्य के रूप में सबसे अधिक 2332 मतों के अंतर से जीती तो पार्टी ने उसे सांकड़ा पंचायत समिति का प्रधान बना दिया।
विधानसभा चुनाव के दौरान पत्रिका के साथ बातचीत में मेहर ने कहा था कि उसने कभी चुनाव में उतरने का सोचा तक नहीं, लेकिन किस्मत राजनीति में लेकर आ गई। अचानक टिकट मिलना, पहली बार खुद के लिए वोट देना और फिर चुनाव जीत जाना, उसके लिए गर्व का दिन रहा। मेहर की वह बातचीत भी अब स्मृति के रूप में शेष रह गई हैं। मेहर दुनिया से जरूर चली गई है, लेकिन पोकरण से लेकर जैसलमेर तक की जनमानस में वह हमेशा याद की जाती रहेंगी। गौरतलब है कि मेहर के निधन के बाद उसकी अन्तिम यात्रा में भी हजारों लोग उमड़े थे उसे नम आंखों के साथ विदाई दी थी।
गौरतलब है कि 24 फरवरी 2019 रविवार अपराह्न पोकरण के पास चाचा गांव के निकट दो कारों की भिड़त में पांच जनों की मौत हो गई थीं। एक कार में सांकड़ा पंचायत समिति की प्रधान अमतुल्ला मेहर सवार थीं। कार को चालक चला रहा था। दुर्घटना इतनी हृद्य विदारक थी कि सामने की कार में सवार सीकर के खाटूश्यामजी निवासी पांच जनों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दूसरी कार में सवार प्रधान अमतुल्ला मेहर गंभीर घायल हो गई थी। हादसे में प्रधान मेहर के सिर पर गंभीर चोट लगी थी। जिससे ब्रेन हेमरेज हो गया। प्रधान मेहर का जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के ट्रोमा आईसीयू में भर्ती कराया गया। घायल प्रधान मेहर को 72 घंटे तक वेंटीलेटर पर रखा गया। लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। दुर्घटना के बाद से प्रधान के परिजन व उनके समर्थक खासे व्यथित व चिन्तित थे। कई लोग उनके स्वस्थ होने की दुआ व प्रार्थना तक कर रहे थे। आखिरकर 27 फरवरी 2019 को मेहर ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।