
जोधपुर. आर्थिक तंगी से जूझ रहे जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय ने इस बार अपने शिक्षकों और कर्मचारियों की कर्मचारी भविष्य निधि फंड से 6 करोड़ रुपए लेकर सेवानिवृत्त कार्मिकों को पेंशन दी। विवि के शिक्षकों और कर्मचारियों को पता चलने पर उन्होंने विरोध प्रकट किया। शिक्षक संघ ने कुलपति से मिलकर पीएफ का पैसा वापस जमा करने को कहा। तीस अप्रेल तक जमा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर विवि प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार से लोन लेने पर 12 प्रतिशत और बैंक 11 प्रतिशत ब्याज लेती है। विवि द्वारा पहले 40 करोड़ लोन लेने पर हर महीने सवा करोड़ रुपए का ब्याज चुकाना पड़ रहा है, जबकि पीएफ का पैसा स्वयं का ही है, जिस पर 8 प्रतिशत ही ब्याज देना पड़ेगा।
शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर डीएस खीची ने बताया कि पीएफ का पैसा कर्मचारी का होता है। उसके अलावा उसमें कोई भी हाथ नहीं डाल सकता। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह आर्थिक अपराध किया है। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में करीब 1500 पेंशनर्स है जिनकी हर महीने करीब 5.50 से 6 करोड रुपए पेंशन बनती है। विश्वविद्यालय की माली हालत खराब होने से पिछले एक साल से पेंशनर्स को पेंशन देने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण कई बार पेंशनर्स ने धरना- प्रदर्शन भी किया है।
100 करोड़ हैं पीएफ फण्ड
विवि के पीएफ फण्ड में करीब 100 करोड़ रुपए हैं। विवि प्रशासन की पीएफ कमेटी ने अधिकतम बीस करोड़ रुपए ही निकालने की सहमति दी है। आठ प्रतिशत ब्याज मिलने से पीएफ फण्ड में बढ़ोतरी भी होगी।
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‘हमने पीएफ फण्ड से लोन लिया है जो विवि को सस्ता पड़ेगा। यह एक तरह का मैनेजमेंट है। खुद के पास पैसा होने के बावजूद दूसरों से महंगी दर पर पैसा लेना वित्तीय हानि होती है।’
-प्रो पीसी त्रिवेदी, कुलपति, जेएनवीयू जोधपुर