
जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय प्रशासन को करीब पांच साल बाद अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यानयन परिषद (नेक) की ग्रेडिंग याद आई है। विवि प्रशासन ने सभी संकाय और विभागों को एकेडमिक रिकॉर्ड तैयार रखने को कहा है। संकायों में इसको लेकर बैठकें हो रही हैं। कागजी कार्यवाही पूरी होने पर नेक टीम को निरीक्षण के लिए बुलाया जाएगा।
जेएनवीयू में पहली बार 2005 में तत्कालीन कुलपति प्रो नसीम भाटिया के समय नेक की टीम ने निरीक्षण किया था। उस समय जेएनवीयू को ‘ए’ ग्रेड मिला था। यह ग्रेडिंग पांच साल यानी 2010 के लिए थी। वर्ष 2011 में तत्कालीन कुलपति प्रो नवीन माथुर ने भी नेक का निरीक्षण करवाया। उस समय विवि को ‘बी’ ग्रेड से संतोष करना पड़ा। इसकी अवधि 2016 में समाप्त हो गई। इसके बाद कुलपति डॉ आरपी सिंह और प्रो गुलाब सिंह चौहान ने ‘नेक’ को लेकर कोई कदम नहीं उठाए। अब नए कुलपति प्रो प्रवीण चंद्र त्रिवेदी ने फिर से यह फाइल खोली है।
क्या है ‘नेक’
उच्च शिक्षण संस्थानों की शिक्षा की गुणवत्ता की ग्रेडिंग तय करने के लिए 1994 में यूजीसी की स्वायत संस्था के रूप में ‘नेक’ की स्थापना हुई। यह ए प्लस प्लस, ए प्लस, ए, बी प्लस प्लस, बी प्लस, बी, सी व डी ग्रेड देती है। ए ग्रेडिंग बहुत अच्छा, बी अच्छा, सी संतोषजनक और डी ग्रेड असंतोषजनक परिणाम दर्शाती है।
क्या फर्क पड़ेगा
नेक की अच्छी ग्रेडिंग के आधार पर ही यूजीसी अपनी ग्रांट तय करती है। इसके अलावा विभिन्न रिसर्च प्रोजेक्ट व प्लेसमेंट पर भी नेक ग्रेडिंग का प्रभाव रहता है। निम्न स्तर की ग्रेडिंग होने पर विवि को नुकसान उठाना पड़ता है।
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‘हमने एनुअल क्वालिटी रिपोर्ट के साथ नेक की तैयारी शुरू कर दी है। धीरे-धीरे हम सभी प्रोसेस पूरा करेंगे।’
प्रो मिलिंद शर्मा, नोडल अधिकारी (नेक निरीक्षण ), जेएनवीयू जोधपुर