
जोधपुर. प्रदेश में युवाओं के टीकाकरण में बजट की कमी के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से स्वैच्छिक अंशदान की अपील के बाद इसमें सहायता को लेकर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के शिक्षक आमने-सामने हो गए हैं। जेएनवीयू शिक्षक संघ के अनुरोध पर विवि प्रशासन ने मई महीने के वेतन में से एक दिन का वेतन ‘मुख्यमंत्री सहायता कोष कोविड टीकाकरण’ में देने का आदेश निकाला। इसके अंतर्गत मूल वेतन व डीए से एक दिन के वेतन की कटौती करनी थी।
यह आदेश जारी होते ही जेएनवीयू शैक्षिक संघ ने विवि प्रशासन को पत्र लिखकर कहा कि स्वैच्छिक सहयोग के लिए कोई भी स्वीकृति नहीं ली गई है। अब बुधवार को फिर से विवि प्रशासन को नया आदेश जारी करना पड़ा। अब केवल उन्हीं शिक्षकों के वेतन से एक दिन के वेतन की कटौती की जाएगी, जो विवि को सहमति देंगे। गौरतलब है कि प्रदेश में युवाओं (18 से 44 वर्ष आयु) का टीकाकरण राज्य सरकार करवा रही है।
विवि में 270 शिक्षक, वेतन लाखों में
जेएनवीयू में करीब 270 शिक्षक है। प्रोफेसर का वेतन औसत 2 लाख महीना, एसोसिएट प्रोफेसर का औसत 1.50 लाख महीना और असिस्टेंट प्रोफेसर का 1 से 1.25 लाख रुपए महीना है। इसके अलावा परीक्षा ड्यूटी, परीक्षा की उत्तर-पुस्तिकाएं जांचने सहित विभिन्न तरह के भत्ते उठाते हैं। विवि के कुछ शिक्षकों का मत है कि उन्हें 10 से 15 दिन का वेतन देना चाहिए ताकि एक बड़ी सहयोग राशि राज्य सरकार को मिल सके।
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‘मुझे 70 शिक्षकों ने तो सहमति दे दी थी। शेष की मौन स्वीकृति समझकर विवि ने वेतन कटौती का आदेश निकाला।’
डॉ हेमसिंह गहलोत, सचिव, जेएनवीयू शिक्षक संघ
‘सभी शिक्षक सहायता करेंगे लेकिन इसके लिए विधिवत् रूप से स्वीकृति ली जानी चाहिए थी। कुछ शिक्षक तो 3 से 5 दिन का वेतन देने को तैयार है।’
प्रो अखिल रंजन गर्ग, सचिव, जेएनवीयू शैक्षिक संघ