
जोधपुर।
राज्य सरकार की ओर से बजट घोषणा में पिछले 4 वर्षों से अल्प मानदेय में काम करने वाले पंचायत सहायकों के मानदेय में 10 प्रतिशत की वृद्धि करने का ढिंढोरा दो बार पिट दिया गया है। एक बारगी तो बजट में घोषणा करके व दूसरी बार वित्तीय स्वीकृति जारी करके। जबकि कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में इन पंचायत सहायकों को नियमित करने का वादा किया गया था। ऐसे में जहां राज्य के 27 हजार पंचायत सहायक नियमित होने की बाट देख रहे है तो दूसरी तरफ सरकार की ओर से अल्प मानदेय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी ऊंट में मुंह में जीरा सिद्ध हो रही है।
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कोरोना योद्धा के रूप में कर रहे काम
वर्तमान में कोरोना संक्रमण के चलते सरकार ने पंचायत सहायकों को घर-घर सर्वे करने, कंट्रोल रूम प्रभारी, बीएलओ, चैक पोस्ट, राशन की दुकान सहित कई प्रकार की जिम्मेदारियां सौंपी है। इसके अलावा स्कूलों व पंचायतों के कार्य भी कर रहे है। कोरोना काल में बिना किसी सुरक्षा के पंचायत सहायक कोरोना योद्धा के रूप में काम कर रहे है।
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पहले विद्यार्थी मित्र अब पंचायत सहायक
- शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए वर्ष 2008 में तत्कालीन सरकार ने 2700 के मानदेय में विद्यालयों में नियुक्ति दी।
- वर्ष 2014 में कार्यमुक्त कर दिया
- विरोध प्रदर्शन के बाद वर्ष 2017 में फि र से संविदा पर पंचायत सहायक पद पर नियुक्ति दी
- अब लगभग 4 वर्षों से ये पंचायतों व स्कूलों में कार्य कर रहे है।
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छह हजार में परिवार चलाना मुश्किल
पंचायत सहायकों को मासिक 6 हजार रुपए का मानदेय दिया जा रहा है। जिससे इनके परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो गया है। पंचायत सहायकों को मनरेगा मजदूरों से भी कम मजदूरी मिल रही है। इसके अलावा इनको ना तो अवकाश का प्रावधान है और ना ही सरकार की ओर से इनको अन्य किसी प्रकार का परिलाभ दिया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में करीब 27 हजार पंचायत सहायक कार्यरत है। इनमें से 80 फ ीसदी से अधिक पंचायत सहायक एमएबीड व बीएसटीसी कर चुके है। पूर्ण योग्यता होने के बाद भी इनसे मजदूरों की भांति कार्य करवाया जा रहा है।
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पंचायत सहायक एवं ग्राम रोजगार सहायक पंचायतीराज विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओं का लंबे समय से कार्य देख रहे हैं। सरकार को इन अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों की मांग पर विचार कर समय रहते नियमित करना चाहए।
नेमाराम चौधरी, जिलाध्यक्ष
पंचायती राज मंत्रालय कर्मचारी संघ