
- महिला बन्दियों की दशा सुधारने के लिए एडीआर सेंटर में कार्यशाला
जोधपुर . जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जोधपुर महानगर अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश, जोधपुर महानगर, नरसिंहदास व्यास ने कहा है कि जेलों में निरुद्ध महिलाओं के साथ रह रहे बच्चों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार न हो और उनको भोजन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा से सम्बन्धित सभी अधिकार मिले तथा साथ ही महिलाओं तक विधिक सेवाओं की पहुंच हो। व्यास बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में महिला बन्दियों को विधिक सेवाएं सुचारू रूप से उपलब्ध कराने के लिए गठित टीम के प्रशिक्षण के लिए एडीआर भवन के कान्फ्रेंस हॉल में कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने जेलों से जानकारी लेकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। प्रतिभागियों को उच्चतम न्यायालय द्वारा आरडी उपाध्याय बनाम आन्ध्रप्रदेश राज्य व अन्य एआईआर 2006 एससी. 1946 में जारी गाइडलाइन से अवगत कराया। कार्यशाला में सीजेएम सिद्धार्थदीप एवं पूर्णकालिक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण निलेशसिंह चौधरी द्वारा गठित टीम को मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
जेल विजिट के शेड्यूल के बारे में भी जानकारी दी। गठित टीम को योजना की गतिविधियों की जानकारी दी गई। नौ सदस्य टीम का गठन किया गया। इसमें डॉ. भालसिंह, डॉ. प्रेमलता चौहान, बाल विकास परियोजना अधिकारी विजयलक्ष्मी परिहार, केन्द्रीय कारागृह उप कारापाल हरप्रसाद कुमावत, चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश टॉक, अति. जिला शिक्षा अधिकारी अशोककुमार विश्नोई, मन संस्था के प्रतिनिधि योगेश लोहिया, पैनल अधिवक्ता रंजनासिंह मेड़तिया व लक्ष्मी रामावत, सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई बजरंग शारस्वत शामिल है। टीम 17 मई, 2018 से 26 मई, 2018 तक 10 दिवसीय कार्यक्रम करेगी। इसमें बन्दी महिलाओं के स्वास्थ्य जांच, प्रसूति सहायता, मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य सेवा, नि:शुल्क विधिक सहायता, व्यावसायिक प्रशिक्षण व पुनर्वास के सम्बन्ध में सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएगी।
कार्यशाला में सीजेएम सिद्धार्थदीप एवं पूर्णकालिक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण निलेशसिंह चौधरी द्वारा गठित टीम को मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
टीम 17 मई, 2018 से 26 मई, 2018 तक 10 दिवसीय कार्यक्रम करेगी।