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भूखी और प्यासी बैठी महिला सफाई कर्मचारी हो गई थी बेहोश, अस्पताल के अधिकारी उड़ा रहे थे दावत

- अस्पताल का एक भी कर्मचारी व अधिकारी संभालने नहीं आया

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भूखी और प्यासी बैठी महिला सफाई कर्मचारी हो गई थी बेहोश, अस्पताल के अधिकारी उड़ा रहे थे दावत


- दो दिन से अनशन पर बैठी थी अनशन पर
- स्वागत समारोह में मजे से खा रहे थे खाना


जोधपुर . ये हैं दो हैरान कर देने वाली तस्वीरें। पहली तस्वीर है दो दिन से भूख से बेहाल अचेत अवस्था में हड़ताल पर बैठी महिला सफाई कर्मचारी की। दूसरी है अपने स्वागत समारोह में खाना खाते हुए प्राचार्य, अधीक्षक व अन्य चिकित्सकों की। दरअसल, महात्मा गांधी अस्पताल में पिछले पांच दिनों से सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। इसकी वजह है सफाई कर्मचारियों को अभी तक उनका वेतन नहीं मिलना। ठेकेदार के आश्वासन से असंतुष्ट सफाई कर्मचारी रविवार को हड़ताल पर चले गए थे। इसके बाद से वे अपने घर नहीं गए और डेरा डालकर अस्पताल के बाहर बने पार्क में ही बैठ गए। बुधवार को पार्क में दो दिन से भूखी और प्यासी बैठी महिला सफाई कर्मचारी मंडोर निवासी लीला भाटी की तबीयत बिगड़ गई। उसे ओपीडी में ले जाया गया। वहां इलाज के बाद इमरजेंसी की आईसीयू में भर्ती कर लिया गया। उधर, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के सभागार में आरएमसीटीए की ओर से नवनियुक्त प्राचार्य डॉ. एसएस राठौड़ के स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इसमें प्राचार्य डॉ. राठौड़ और अस्पताल अधीक्षक डॉ. पीसी व्यास समेत अन्य चिकित्सक इत्मीनान से खाना खा रहे थे।

वार्डों और इमरजेंसी के बिगड़े हालात

गांधी अस्पताल में पिछले चार दिनों से हड़ताल के चलते सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। वार्डों से लेकर गलियारे और इमरजेंसी तक गंदगी से अटे पड़े हैं, लेकिन सफाई कर्मचारियों को अब तक अस्पताल प्रशासन वेतन दिलाने में नाकाम रहा है। ठेकेदार पर अस्पताल प्रशासन का जोर इसलिए नहीं चल रहा है, क्योंकि ठेका खत्म हो चुका है। प्राचार्य के निरीक्षण में तो जिम्मेदारों ने वेतन को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे कि कर्मचारियों को ठेकेदार ने वेतन नहीं दिया तो उसकी जमा सिक्योरिटी राशि में से कर्मचारियों को वेतन दे दिया जाएगा, लेकिन अब तक यह इस पर विचार नहीं किया गया है।

नहीं मिला स्ट्रेचर
महिला सफाई कर्मचारी की लगातार हालत खराब होती गई, लेकिन सफाई कर्मचारियों के अलावा अस्पताल का एक भी कर्मचारी और अधिकारी उसकी सुध लेने तक नहीं आया। इतना ही नही,ं पार्क में अचेत अवस्था में पड़ी महिला को ओपीडी तक पहुंचाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला। बाद में सफाई कर्मचारी इधर-उधर से जुगाड़ कर व्हीलचेयर लेकर आए। इसके बाद कहीं जाकर उसे ओपीडी में स्ट्रेचर मिली।

ट्रेजरी से पास करवा दिया बिल

इनका बिल ट्रेजरी से पास करवा दिया है। एकाउंट्स में भी डलवा दिया है, लेकिन उन्हें वेतन सुबह ही मिल पाएगा। फिर भी यह वेतन मिलने पर ही वे काम पर लौटने की बात कह रहे हैं।
डॉ. पीसी व्यास, अधीक्षक, महात्मा गांधी अस्पताल,जोधपुर

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