जोधपुर

शराबियों-जुआरियों का अड्डा बन रहा है उम्मेद उद्यान, यहां की सुध लेने वाला तक कोई नहीं

शहर के मध्य उम्मेद उद्यान ही ऐसा पार्क है जहां सर्वाधिक हरियाली और पेड़ है। लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण पार्क में शरारती युवाओं की ओर से प्रतिबंधित खेल गतिविधियों के दौरान लोगों को चोटिल करने से कोई रोकने वाला नहीं है। पार्क में करीब 100 से अधिक श्वानों के अलग-अलग समूह घूमते रहने से लोगों को काटने का डर बना रहता है।
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शराबियों-जुआरियों का अड्डा बन रहा है उम्मेद उद्यान, यहां की सुध लेने वाला तक कोई नहीं

नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. शहर और मारवाड़ की आम जनता के मनोरंजन के लिए महाराजा उम्मेदसिंह की ओर से वर्ष 1936 में शहर के हृदय स्थल पर निर्मित उम्मेद उद्यान दुर्दशा का शिकार बन चुका है। शहर की तीन पीढिय़ों से जुड़े रहे उद्यान परिसर में 1970 से करीब पांच दशक तक संचालित जंतुआलय परिसर में कभी जहां शेरों की दहाड़ गूंजा करती थी वहां अब बड़ी संख्या में श्वानों के समूह के साथ शराबियों और जुआरियों ने अपना अड्डा बना लिया है।

शहर के मध्य उम्मेद उद्यान ही ऐसा पार्क है जहां सर्वाधिक हरियाली और पेड़ है। लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण पार्क में शरारती युवाओं की ओर से प्रतिबंधित खेल गतिविधियों के दौरान लोगों को चोटिल करने से कोई रोकने वाला नहीं है। पार्क में करीब 100 से अधिक श्वानों के अलग-अलग समूह घूमते रहने से लोगों को काटने का डर बना रहता है। पूरा पार्क शाम ढलते ही अंधेरे में डूब जाता है। यह हालात पिछले तीन साल से जारी हैं। जिला प्रशासन और पूर्व महापौर की ओर से पार्क के विकास को लेकर की गई लंबी चौड़ी घोषणाएं कागजों में ही अटकी है।

तीन साल बाद भी नहीं हटा मलबा
पर्यावरण और वन्यजीवों के बीच प्रमुख सेतू की भूमिका निभाने वाला जोधपुर का चिडिय़ाघर वर्ष 1970 से संचालित होता रहा। राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से 24 अगस्त 2015 को न्यायाधीश गोविन्द माथुर व न्यायाधीश जयश्री ठाकुर ने उम्मेद उद्यान में विद्यमान जंतुआलय और सभी वन्यजीवों को कायलाना के पास नवनिर्मित माचिया जैविक उद्यान में शिफ्ट करने को कहा था।

राज्य सरकार की ओर से उम्मेद उद्यान के पिंजरों, एनक्लोजर या भवन को गिराने या हटाने के आदेश के बाद वन विभाग ने टेंडर जारी कर दिए। वर्ष 2017 में चिडिय़ाघर को माचिया जैविक उद्यान में शिफ्ट किए जाने के बाद ठेकेदार ने एंटीक पिंजरे ले जाने के बाद तीन साल से मलबा तक नहीं हटाया गया है। पार्क में लावरिस पेड़ों को काटकर ले जाया जा रहा है लेकिन कोई रोकने वाला तक नहीं है।

फैक्ट फाइल
-1935 में निर्मित उम्मेद उद्यान का नाम सबसे पहले विलिंगडन गार्डन रखा गया था।
-सुमेर पुस्तकालय और सरदार संग्रहालय इमारतों के निर्माण पर हुआ था 6 लाख 9 हजार 870 खर्च
-मारवाड़ के तत्कालीन सेठ मंगनीराम बांगड़ के वंशज रामनारायण प्रसाद ने दिया था आर्थिक सहयोग
-17 मार्च 1936 को महाराजा उम्मेदसिंह व भारत के पूर्व वायसराय गर्वनर जनरल ऑफ इंडिया लॉर्ड विलिंगडन ने किया था उदघाटन

विकास नहीं हो रहा विनाश
उम्मेद उद्यान का विकास तो नहीं विनाश जरूर हो रहा है। सर्वाधिक हरियाली वाला शहर का एकमात्र उद्यान है। शहर के मध्य में प्रात:कालीन भ्रमण करने बड़ी संख्या में लोग आते हैं। उद्यान में हरियाली सूख रही है। उद्यान में लंबे अर्से से फैली गंदगी और मलबा हटना तो दूर जो शौचालय बनाए गए है उसकी भी नियमित सफाई नहीं हो रही है। उद्यान के गेट संख्या 5 के पास शौचालय की टंकियों पर भी चोर हाथ साफ कर चुके हैं। ऐतिहासिक नवलखा बावड़ी से जालियां चोरी हो रही है। सडक़ें जीर्णशीर्ण हालात में है।
- डॉ. देवीलाल पंवार, अध्यक्ष, वरिष्ठ नागरिक गार्डन्स विकास समिति जोधपुर

Published on:
16 Dec 2019 01:10 pm