Jodhpur Handicraft Export: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और एयरस्पेस बंद होने से जोधपुर का हैंडीक्राफ्ट निर्यात उद्योग नई मुश्किलों में घिर गया है। रेड-सी मार्ग प्रभावित होने की आशंका के बीच फ्रेट दरों में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय फेयर पर असर की चिंता बढ़ने लगी है।
जोधपुर। अमरीका की टैरिफ नीति से उबरने की कोशिश कर रहा हैंडीक्राफ्ट निर्यात उद्योग अब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से नई चिंता में है। खाड़ी क्षेत्र में हालात बिगड़ने और कई देशों के एयरस्पेस बंद होने से निर्यातकों की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
निर्यातकों के अनुसार यदि यही स्थिति बनी रही तो 10 दिन बाद होने वाले प्रतिष्ठित आइएमएम कोलोन फेयर पर असर पड़ सकता है। इस अंतरराष्ट्रीय मेले में भाग लेने के लिए भारतीय निर्यातक और खरीदार बड़ी संख्या में हवाई मार्ग से यात्रा करते हैं। एयरस्पेस बंद रहने से यात्रा के साथ-साथ सैंपल और डिस्प्ले सामग्री की शिपमेंट भी प्रभावित हो सकती है। अप्रेल में प्रस्तावित हाई पॉइंट मार्केट को लेकर भी संशय की स्थिति है। यदि समय पर माल रवाना नहीं हो पाया तो बड़े ऑर्डर अटक सकते हैं।
खाड़ी देशों से होकर गुजरने वाला समुद्री मार्ग भी तनाव की वजह से प्रभावित होने की आशंका है। यदि यह रूट बाधित होता है तो कंटेनर की कमी और फ्रेट दरों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। पहले से बढ़ी लॉजिस्टिक्स लागत के बीच अतिरिक्त फ्रेट उद्योग पर और दबाव डालेगा। रास्ते बंद होंगे तो फ्रेट बढ़ेगा और डिलीवरी शेड्यूल बिगड़ने से कई ऑर्डर होल्ड पर जा सकते हैं।
जोधपुरी हैंडीक्राफ्ट का सबसे बड़ा मार्केट अमरीका व यूरोप है, लेकिन इसका रास्ता मिडिल ईस्ट से होकर जाता है। लाल सागर का रास्ता यदि इस युद्ध व तनाव के कारण बंद होता है तो आगामी दिनों में संकट काफी बढ़ेगा। इससे पहले इजराइल-हमास संकट के दौर में भी महंगे फ्रेट पर निर्यात किया जा रहा था।
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आने वाले दिनों में निर्यात संकट बढ़ने की आशंका है। यदि यह तनाव लंबा चला तो फ्रेट बढ़ेगा और यहां आने वाले खरीदारों की संख्या कम हो सकती है।
आइएमएम कोलोन फेयर आगामी दिनों में होने वाला है। कई सैंपलिंग और अन्य प्रकार का निर्यात प्रभावित होगा। ऐसे में यदि रेड-सी मार्ग बंद होता है तो संकट और गहराएगा।
जोधपुर और इंडिया आने वाले कई खरीदारों व पर्यटकों के ग्रुप टूर कैंसिल हो गए हैं। अगर दो-तीन दिन में इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ तो यह स्थिति लंबी चल सकती है और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा।