जोधपुर का हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट सेक्टर अमरीका द्वारा प्रस्तावित 500 प्रतिशत टैरिफ के खतरे से जूझ रहा है। उद्योग जगत का कहना है कि ऐसा होने पर शहर की अर्थव्यवस्था, निर्यात और रोजगार पर गंभीर असर पड़ेगा।
जोधपुर। जोधपुर का हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट सेक्टर एक बार फिर बड़े संकट की आशंका में है। यदि अमरीका की ओर से 500 प्रतिशत तक टैरिफ लागू किया गया, तो इसका असर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह शहर की अर्थव्यवस्था और रोजगार ढांचे को भी झकझोर देगा। उद्योग संगठनों का कहना है कि मौजूदा करीब 50 प्रतिशत टैरिफ में ही निर्यातकों की कमर टूट चुकी है, ऐसे में 500 प्रतिशत टैरिफ लागू हुआ तो हालात और अधिक विकट हो जाएंगे।
जोधपुर का करीब 40 से 50 प्रतिशत एक्सपोर्ट अमरीका पर निर्भर है। हैंडीक्राफ्ट, वुडन फर्नीचर, फर्नीचर और टेक्सटाइल से जुड़े उत्पाद यहां से बड़े पैमाने पर अमरीका के बाजार में भेजे जाते हैं। मौजूदा हालात में ही अमरीका को होने वाला निर्यात तेजी से घटा है। निर्यातकों के अनुसार, पहले जोधपुर से हर महीने लगभग 200 कंटेनर एक्सपोर्ट होते थे, लेकिन 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद यह संख्या घटकर 80 से 100 कंटेनर रह गई है। यदि टैरिफ और बढ़ा, तो यह आंकड़ा और नीचे आ सकता है।
शहर से सालाना लगभग 4,000 से 4,500 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट होता है। इसमें से करीब 50 प्रतिशत यानी लगभग 2,000 करोड़ रुपए का निर्यात सिर्फ अमरीका को होता है। 25 से 30 प्रतिशत निर्यात यूरोप में होता है, लेकिन यूरोप का बाजार सुस्त है। यदि अमरीका का बाजार पूरी तरह बंद हुआ, तो जोधपुर के लिए यह बड़ा आर्थिक झटका होगा। छोटे और मझोले निर्यातकों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा और कई यूनिट्स के बंद होने की आशंका बढ़ जाएगी।
टैरिफ बढ़ने का सबसे गंभीर असर रोजगार पर पड़ेगा। एक्सपोर्ट सेक्टर से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े करीब एक लाख लोगों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है। उद्योग जगत का आकलन है कि 500 प्रतिशत टैरिफ लागू होने पर 70 से 80 प्रतिशत तक रोजगार समाप्त हो सकता है। कारीगरों, मजदूरों, पैकिंग यूनिट्स, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन से जुड़े हजारों परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत दिनेश ने बताया कि निर्यात सेक्टर अब विकल्प तलाश रहा है। सचिव राजेंद्र मेहता का कहना है कि सरकार को समय रहते हस्तक्षेप करना चाहिए। टैरिफ को लेकर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत, नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तलाश और निर्यातकों के लिए राहत पैकेज जैसे कदम जरूरी हैं।