
नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. उगमजी के बंगले का निर्माण महाराजा सरदारसिंह ने अपने एडीसी उगमसिंह चांदेलाव के लिए सन 1908 से 1911 के दरम्यान करवाया था । घाटू के लाल पत्थर से निर्मित बंगले का नक्शा जोधपुर रेलवे के मैनेजर मिस्टर डब्ल्यू होम और उन्हीं की देखरेख में पीडब्ल्यूडी विभाग ने इसका निर्माण किया । लेकिन संयोग से महाराजा का 20 मार्च 1911 को देहान्त हो गया और बंगला ठाकुर उगमसिंह को इनायत हो ही नहीं सका । वर्ष 1915-16 में इस बंगले में दरबार हाई स्कूल और सन 1926 में इसी भवन में सूरसागर रेजीडेन्सी में संचालित सरदार म्यूजियम भी स्थानान्तरित किया गया । इसके कुछ हिस्से में राज्य के जंगलात महकमा के दफ्तर और बाद में शिक्षा विभाग आदि से सम्बन्धित विभाग भी रहे । वर्ष 1954 में पुन: दरबार स्कूल को यहां स्थानान्तरित किया गया और 1956 में स्कूल को माध्यमिक विद्यालय का दर्जा दिया गया । कालान्तर में यह विद्यालय राजकीय नवीन उच्च माध्यमिक विद्यालय के नाम से जाना जाने लगा जो वर्तमान में भी स्थित है ।
जोधपुर की प्रथम इंजीनियरिंग कॉलेज भी होती थी संचालित
दरबार हाई स्कूल पूर्व में सर्वप्रथम सन 1867 में गुलाब सागर के पास महिला बाग में थी। वहां से यह सन 1873 में शहर की जूनी धानमण्डी में स्थित तलहटी के महलों में और वहां से पुराना बिजली घर परिसर में नजर बाग नामक पीले रंग के बंगले में आ गई और 6 जनवरी 1916 से 1925 तक उगमजी के बंगले में संचालित की गई। जोधपुर का इंजीनियरिंग कॉलेज भी काफी समय उगमजी के बंगले में ही संचालित किया गया। जब 1951 में सेठ मगनीराम राजकुमार बांगड़ के 6 लाख रुपयों की वित्तीय सहायता से इंजीनियरिंग कॉलेज का भवन रातानाडा में बनना शुरू हुआ तब तक उसका अस्थायी कार्य भी उगमजी के बंगले में चलता रहा। घाटू के लाल पत्थर से निर्मित यह भवन आज भी अपने वैभव का बखान कर रहा है ।
फोटो साभार एमएमटी