
जोधपुर।
बांस की कारीगरी और व्यापार के क्षेत्र में दुनियाभर में डंका बजाने वाले चीन को अब भारत से चुनौती मिल रही है। और यह चुनौती दे रहा है जोधपुर । जोधपुर में झारखण्ड व नॉर्थ इस्ट से आए कारीगर अपनी उत्कृष्ट कारीगरी के बदौलत सउदी अरब का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। नतीजतन पिछले आठ माह में तीन लाख रुपए की टोकरियां सउदी अरब निर्यात हो चुकी है। साथ ही एक करोड़ रुपए के अगले ऑर्डर पर भी सहमति हो गई है।
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झारखण्ड व नॉर्थ इस्ट के कारीगर
बांस की टोकरियों के बड़े खरीदार सउदी अरब ने अब चीन को दरकिनार कर जोधपुर में बनी बांस की पैकेजिंग बास्केट (छोटी सुंदर टोकरी) का आयात शुरू किया है। 20 साल से चीन से कारोबार कर रही सउदी अरब की कंपनी ने इस बार जोधपुर की बांस के उत्पाद बनाने वाली फ र्म के माध्यम से जोधपुर के बांस प्रोडक्ट को बेहतर बताते हुए यह सौदा किया है। जोधपुर में बास के कारीगर झारखण्ड व नॉर्थ इस्ट से आए है व कई हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक इनसे वहां के आइटम बनवा रहे है । --
जोधपुर में 30 हजार कारीगर
जोधपुर के करीब 30 हजार कारीगर नॉर्थ इस्ट के है, जो निर्यातकों के यहा काम कर रहे है । जोधपुर में अधिकांश मोहली समाज के लोग बांस पर अपनी कला का जलवा दिखा रहे है।
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सउदी अरब में प्रचलन ज्यादा
सऊदी अरब में बांस की बनी बास्केट में गिफ्ट भेंट करने का प्रचलन ज्यादा है। रमजान के समय बांस के बास्केट की बड़ी मांग होती है। इसमें खजूर, ड्राय फ्रूट्स भरकर रिश्तेदारों को दिया जाता है।
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भारत के बांस की विदेशों में मांग बढ़ रही है। विदेशी मांग को देखते हुए जोधपुर में भी निर्यातकों ने बांस के प्रोडक्ट्स बनाने शुरू किए है और निर्यात कर है।
डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन