
जोधपुर ।
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हुए फिदायीन हमले में जोधपुर के पाली रोड स्थित कृष्णानगर की शिप्रा (35) पुत्री पवन शर्मा की मृत्यु हुई है। वह आतंक प्रभावित क्षेत्रों में पीडि़त अफगान नागरिकों के पुनर्उत्थान व पुनर्वसन के लिए कार्यरत स्वयंसेवी संस्था (एनजीओ) एआईसीएस में निदेशक (सर्टिफिकेशन)थी और हमले से एक दिन पहले ही जोधपुर से काबुल पहुंची थी।
शिप्रा के रिश्तेदार श्रवण त्रिवेदी ने बताया कि शिप्रा काबुल में एनआरआइ के लिए स्थापित कम्पाउण्ड ग्रीन विलेज में रह रही थी। गत 14 जनवरी की रात आठ बजे आरडीएक्स से भरे ट्रक को ग्रीन विलेज से भिड़ा दिया गया था। इससे हुए भीषण विस्फोट में कम्पाउण्ड की दीवार गिरने से शिप्रा भी चपेट में आ गई और उसकी मृत्यु हो गई थी। धमाके में तीन अन्य लोगों की मौत और कई लोग घायल भी हुए थे।
शिप्रा की मृत्यु का पता लगते ही पिता व भाई सन्न रह गए। शिप्रा का शव जोधपुर लाने के लिए उन्होंने भारतीय दूतावास के साथ केन्द्रीय राज्य मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत से सम्पर्क किया। इसके चलते पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार को शव सौंप दिया और देर शाम हवाई मार्ग से दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया। शव के शुक्रवार दोपहर तक जोधपुर पहुंचने की संभावना है।
तीन माह से थी कार्यरत, 11 जनवरी को गई थी काबुल
शिप्रा तीन महीने से काबुल में एनजीओ के लिए कार्य कर रही थी। वह गत दिनों जोधपुर आई थी और 11 जनवरी को ही काबुल के लिए रवाना हुई थी। वो 13 जनवरी को काबुल पहुंची। अगले दिन धमाके में जान चली गई। उसके चार साल का एक पुत्र है।