
अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. एलईडी पोल के लिए गत फरवरी माह में निकाली गई ऑनलाइन निविदा में नगर निगम ने एक ही फर्म के टेंडर आने पर नियम विरुद्ध उसी को टेंडर जारी कर दिया। यह टेंडर नगर निगम ने फरवरी में ई-टेंडर प्रक्रिया में जारी किया था। जबकि नियमों के अनुसार इस तरह के टेंडर महज विशेष आपात परिस्थितियों में ही जारी होते हैं। इस मामले में निगम के पास किसी तरह की विषम परिस्थितियां नहीं थी। इस मामले में निगम ने खुद अपने राजस्व का नुकसान किया है। आरोप है कि इसमें चहेतों को लाभ पहुंचाने का कार्य किया गया है।
एनएस पब्लिसिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नामक फर्म को दस साल के लिए बिल्ट-ऑपरेट एंड ट्रांसफर की तर्ज पर ठेका दिया गया है। इस फर्म की निविदा को सिंगल टेंडर के लिहाज से निगम अधिकारियों ने निरस्त तक नहीं किया। जबकि नियमानुसार हर सिंगल टेंडर की प्रक्रिया में नियमों को ध्यान में रखा जाता है, लेकिन इस पूरे मामले में सभी नियम कायदे ताक पर रख दिए गए। इस फर्म को शहर में 9 स्थान घंटाघर, पांचबत्ती चौराहा, सर्किट हाउस, पावटा, झालामंड, जलजोग, पांचवीं रोड, आखलिया चौराहा व शास्त्रीनगर में बीओटी तर्ज पर एलईडी लगाने का कार्य सौंपा है। इससे निगम को सालाना महज पांच लाख रुपए ही आय होगी। इसके लिए निगम ने कोई ले-आउट स्वीकृत नहीं कराया।
यह कंपनी दस साल तक खुद का खर्चा वहन कर एलईडी लगाएगी और संचालन भी करेगी। साथ ही दिन में कुछ घंटे निगम का भी प्रचार करेगी। दुर्घटनाओं को बढ़ाएगी, जयपुर में बंद हुआ था प्रोजेक्टजयपुर शहर में इन एलईडी के चक्कर में दुर्घटनाएं बढ़ी तो वहां इन पर तुरंत रोक लगा दी गई। वहीं अब जोधपुर शहर में भी ऐसी घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। इस तरह की एलईडी वाहन चालक का ध्यानाकर्षण करती है और दुर्घटनाओं का कारण बनती है।
कायदे ताक पर रख लगा दी एलईडी
इस जयपुर बेस्ड आउटडोर पब्लिसिटी एजेंसी को हाल ही में पांच बत्ती चौराहे सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर 10 ग्लोसाइन यूनिपोल लगाने की अनुमति प्रदान की। एजेंसी ने इस अनुमति के बाद नियम कायदों को ताक पर रख रोड के साइड पर स्थित डिवाइडर पर ही अपने यूनिपोल के फ ाउंडेशन बना खड़ा कर दिया। इससे ना सिर्फ शहर के एकमात्र इस गौरव पथ का सौंदर्य समाप्त हुआ है बल्कि इस व्यस्ततम मार्ग स्थित चौराहे के सुचारू ट्रैफि क में भी बाधा शुरू हो गई। इसी प्रकार के विभिन्न चौराहों, सर्किट हाउस सर्किल, पावटा सर्किल, झालामंड सर्किल, जलजोग सर्किल, 5वीं रोड चौराहा, आखलिया सर्किल, शास्त्री नगर सर्किल तथा घंटाघर क्षेत्र में स्थापित होने वाले यूनिपोल के निर्माणाधीन फ ाउंडेशन में भी नियमों का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
ये है नियम
नगर निगम की ओर से किसी भी एजेंसी को यूनिपोल लगाने की अनुमति प्रदान करने के साथ ही निगम की ओर से जारी दिशा निर्देशों में पब्लिसिटी एजेंसी द्वारा विभिन्न विभागों यथा जिला कलक्ट्रेट, सार्वजनिक निर्माण विभाग, जेडीए, ट्रैफि क साहित संबंधित अन्य विभागों से अनापत्ति/स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ही यूनिपोल स्थापित करने आदेश दिए जाते हैं। सभी विभागों की एनओसी प्राप्त होने के बाद निगम की ओर से नियमानुसार साइट प्लान जारी किया जाता है। इसके बाद ही संबंधित एजेंसी यूनिपोल को स्थापित कर सकती है।
इनका कहना है
यूनिपोल गैंट्रीज के आगे लगा दिए गए हैं। जिससे दिशा suchak भी नहीं दिखेंगे। एलईडी लगने से हमारे यूनिपोल भी नजर नहीं आएंगे।
- ताराचंद भाटी, सिद्धि विनायक एडवरटाइजिंग
ये सडक़ के बीच में लगाए जा रहे हैं। ट्रेफिक में बाधा उत्पन्न होगी। शहर की सुंदरता भी बिगड़ेगी। निविदा में तीन बार तक सिंगल टेंडर जारी नहीं हो सकता। खराब साइट का किराया भी 1 लाख से ऊपर है। निगम ने यह घाटे का सौदा किया है।
- प्रवीण गर्ग, राजस्थान एडवरटाइजिंग
फरवरी माह में मैं नहीं था। यदि अनियमितता हुई है तो मामला दिखवाकर ही आगे कुछ कह सकूंगा।
- दुर्गेश बिस्सा, आयुक्त, नगर निगम