
अविनाश केवलिया/जोधपुर. शहरवासी जहां सुकून की तलाश में आते हैं वहां बदहाल परिस्थितियां लोगों का स्वागत करती हैं। ये ऐसे उद्यान हैं जो सालों पुराने हैं। लेकिन समय-समय पर सरकारी विभागों की लापरवाही व उदासीनता का शिकार हो जाते हैं। खास बात यह है कि प्रतिदिन इन उद्यानों में सैकड़ों लोग सेहत के प्रति सजग रहने, पर्यटन व भ्रमण के लिए आते हैं। लेकिन शहर के सबसे पुराने उद्यानों में से एक उम्मेद उद्यान, मंडोर उद्यान और नेहरू उद्यान उजड़ी हुई हालात की अपनी कहानी बयां करते हैं। इधर, इसके विपरीत नए उद्यानों पर लाखों रुपए लगा रहे हैं। नए उद्यानों के विकास के लिए जोधपुर विकास प्राधिकरण गणेश उद्यान के निकट लाखों रुपए खर्च कर रही है।
मंडोर उद्यान: हालत खस्ता
शहर के सबसे बड़े उद्यानों में शुमार मंडोर उद्यान में प्रतिदिन देशी-विदेशी पर्यटक सैर के लिए आते हैं। लेकिन यहां टूटी पड़ी रैलिंग, कई जगह सूखी हुई घास ही उनका स्वागत करती है। उद्यान के बीच में से निकलती नहर की कई समय से सफाई नहीं होने के कारण यह भी उद्यान की सुंदरता पर दाग लगाती है। इसके अलावा उद्यान में सालों पुराने फाउंटेन फव्वारे भी बंद पड़े हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग की उद्यान विंग इसका काम देखती है। लेकिन इनके पास भी हालात सुधारने के लिए कोई बड़ा बजट नहीं आया है।
उम्मेद उद्यान: छाई रहती है वीरानी
शहर का सबसे पुराना उद्यान है। शहर के बीचोबीच इस उद्यान में कभी जंतुआलय संचालित होता था। तब सैलानियों की भीड़ भी देखने को मिलती थी। लेकिन माचिया में जानवरों को शिफ्ट करने के बाद से हालात विरान से हैं। सुबह-शाम सैर करने लोग आते हैं। उनको उजड़े हुए फव्वारे, खतरे को बुलावा देते बिजली के पोल के खुले तार ही देखने को मिलते हैं। उद्यान के कई हिस्सों में घास भी सूख चुकी है। इस उद्यान का रखरखाव भी पीडब्ल्यूडी ही करता है। लेकिन यहां भी बजट की कमी ही सामने आती है।
नेहरू उद्यान: झूले खराब और फाउंटेन बंद
शहर के पॉश क्षेत्र में होने से यह उद्यान अपेक्षाकृत हालात में थोड़ा ठीक है। लेकिन सुकून तो यहां भी नहीं मिलता। नगर निगम की निगरानी में यहां काम भी हो रहा है, लेकिन जो व्यवस्थाएं बिगड़ चुकी है, उसको सुधारने के प्रयास होते नहीं दिख रहे। टूटे बच्चों के झूले और बंद फाउंटेन यहां भी हकीकत बयां करते हैं। पिछले साल मानसून में बारिश का पानी भरने से यह उद्यान उजडऩे के कगार पर पहुंच गया। अब चार दीवारी बना कर नाले के पानी को उद्यान में भरने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।