
अमित दवे/जोधपुर. मॉडर्न युग में लोगों की लाइफ स्टाइल में बदलाव हो रहा है। लोग अपने घरों की साज सजावट पर विशेष फोकस करने लगे है। रंग-बिरंगी मछलियों के शौकीन लोग अपने घरों में मछलीघर (एक्वेरियम) को सजावट का हिस्सा बना रहे है। ये एक्वेरियम कई आकार के होते हैं। लेकिन जोधपुर के गुरमीतसिंह लौटे ने महज एक इंच का एक्वेरियम बना डाला। गुरमीत के बनाए इस छोटे से एक्वेरियम में दो मछलियां भी हैं। गुरमीत ने बताया कि जोधपुर में एक्वेरियम का चलन बढ़ रहा है।
दोस्तों की बात मानी
गुरमीत ने बताया एक दिन दोस्तों के पास बैठे थे तो दोस्तों ने मजाक में बोला कि एक ऐसा एक्वेरियम बनाओ, जो सबसे छोटा हो और उसमें मछलियां, रियल पौधा भी हो ताकि दिखने में नेचरल लगे। दोस्तों की बात को गुरमीत ने चैलेंज की तरह लिया और निरंतर प्रयासों के बाद सबसे छोटा एक्वेरियम बनाया। जो आकार में एक इंच का है। इस एक्वेरियम में दो मछलियां, दो पौधें और डेकोरेशन के लिए शंख व रॉक्स भी है। जो आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।
डिमाण्ड के अनुसार बनाते हैं
एक्वेरियम शॉप चलाने वाले गुरमीत ने बताया कि लोगों की डिमांड के अनुसार एक्वेरियम बनाते हैं। इसके लिए जगह, वातावरण, मछलियों की किस्म आदि को ध्यान में रखा जाता है। अमूमन लोग अपने ऑफि स, व्यवसायिक प्रतिष्ठान, बैंक, हॉल, स्कूलों, घरों के लिविंग हॉल, दीवार में बनी खिडक़ी व खुली अलमारी के हिस्से में लगाने के लिए अलग-अलग आकार में एक्वेरियम बनाते हैं।
100 प्रजाति की मछलियां
गुरमीत ने बताय कि एक्वेरियम के हिसाब से 100 से अधिक प्रजाति की डेकोरेटिव मछलियां पाई जाती है। इनमें गोल्ड ग्रुप की रेड गोल्ड, रेड केप, ब्लेक मॉर, लिची गोल्ड, कॉपर गोल्ड, टाइगर शार्क प्रमुख है। फाइटर ग्रुप की एरोवाना, रेड पैरेट, सिचलिड, टिनफोइल, गुरामी, मौली, एंजल, रोजी बार्ब, टाइगर बार्ब, टेट्राज, डेनिओ आदि प्रमुख हैं।