
जोधपुर. सरकार के आदेश की अनदेखी कर तत्कालीन भोपालगढ़ बीडीओ को कार्यमुक्त करने की बजाए एएसीइओ पद पर लगाना जिला प्रशासन को भारी पड़ गया। गत लोकसभा चुनाव की आचार संहित लगने से पूर्व बीडीओ का स्थानांतरण भीलवाड़ा के जहाजपुर में किया गया था। लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें कार्यमुक्त करने की बजाए जिला परिषद में एएसीइओ लगा दिया। मामला ध्यान में आने पर राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के संयुक्त शासन सचिव ने गत लोकसभा चुनाव की आचार संहिता से पूर्व 28 मार्च को आदेश जारी कर भोपालगढ़ के तत्कालीन विकास अधिकारी (बीडीओ) त्रिलोकराम दैया सहित 9 अधिकारियों का तबादला किया था। लेकिन जिला प्रशासन ने विभागीय आदेश के विपरीत 3 मई को दैया को अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद जोधपुर (एएसीइओ) के पद लगा दिया। इस पद पर दैया करीब पांच माह से कार्यरत हैं। जानकारी मिलने पर विभाग के विशिष्ट शासन सचिव आरूषि अजेय मलिक ने दैया को कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए हैं।
आदेशों की अनदेखी नहीं करने का आदेश भी जारी हुआ था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने 5 अगस्त को प्रदेश के सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी व जिला कलक्टर को आदेश जारी किया कि वे अपने स्तर पर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के पदस्थापित स्थान में परिवर्तन नहीं करें। आदेश के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से एएसओ दैया को कार्यमुक्त नहीं किया गया।
मामले की जांच करेंगे
तत्कालीन बीडीओ को कार्यमुक्त करने की बजाए एएसओ कैसे लगाया गया इस मामले की जांच करेंगे। दैया को कार्यमुक्त किया जाएगा।
एमएल नेहरा, (एडीएम प्रथम, अतिरिक्त कार्यभार जिला परिषद सीइओ)