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Jodhpur : जोधपुर में ‘जॉम्बी ड्रग’ का पहला अलर्ट, पुलिस-खुफिया एजेंसियां सतर्क, जानें कितना खतरनाक है

Jodhpur : जोधपुर शहर में नशीले पदार्थों के बदलते ट्रेंड के बीच अब ‘जॉम्बी ड्रग’ को लेकर पहली बार गंभीर अलर्ट सामने आया है। जिसके बाद जोधपुर में पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

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प्रतीकात्मक फोटो - AI

Jodhpur : जोधपुर शहर में नशीले पदार्थों के बदलते ट्रेंड के बीच अब ‘जॉम्बी ड्रग’ को लेकर पहली बार गंभीर अलर्ट सामने आया है। कोरोना काल में एमडी ड्रग की एंट्री के करीब पांच साल बाद यह नया खतरा दस्तक देता नजर आ रहा है। फिलहाल कुछ मेट्रो शहरों तक सीमित यह ड्रग तेजी से तस्करी नेटवर्क के जरिए छोटे शहरों तक पहुंच सकता है, जिसे लेकर जोधपुर में पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

चंडीगढ़ की एक हालिया घटना ने इस खतरे की गंभीरता को उजागर किया है। एक युवक घंटों तक सड़क पर बिना हिले-डुले खड़ा रहा। उसने कोई उपद्रव नहीं किया, फिर भी पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। बाद में सामने आया कि वह ‘जॉम्बी ड्रग’ के प्रभाव में था। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी ऐसे मामलों को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है।

जोधपुर पहले भी ड्रग तस्करी के नए रूट का गवाह रहा है। वर्ष 2020 में एमडी ड्रग गोवा-मुंबई से सांचौर के रास्ते प्रदेश में पहुंची और बाद में इसकी सप्लाई उत्तर-पूर्वी राज्यों तक फैल गई। पंजाब बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थ मंगाने के इनपुट भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं, जिनमें जोधपुर के नेटवर्क की भूमिका जांच एजेंसियों के रडार पर रही है।

जॉम्बी ड्रग : शरीर जड़, दिमाग सुस्त

‘जॉम्बी ड्रग’ में प्रायः जायलेजिन जैसे सिडेटिव का उपयोग होता है, जो मूल रूप से पशु चिकित्सा के लिए है। इसे अवैध रूप से अन्य ड्रग्स में मिलाकर बेचा जा रहा है। इसके प्रभाव में व्यक्ति घंटों तक लगभग जड़ अवस्था में रह सकता है, प्रतिक्रिया देना बंद कर देता है और बाहरी दुनिया से कट जाता है। यही वजह है कि ऐसा व्यवहार आमजन को संदिग्ध या खतरनाक प्रतीत होता है, जबकि असल में वह गहरे नशे या मानसिक स्थिति का असर होता है।

कानून और स्वास्थ्य के बीच फंसा सच

देश में एनडीपीएस कानून कड़ी सजा पर आधारित है, जबकि मानसिक स्वास्थ्य कानून इलाज और पुनर्वास की बात करता है। जमीनी स्तर पर इन दोनों के बीच तालमेल की कमी के कारण पुलिस की पहली प्रतिक्रिया गिरफ्तारी बन जाती है, जबकि कई मामलों में जरूरत मेडिकल इंटरवेंशन की होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गैप को दूर नहीं किया गया तो पीड़ितों को अपराधी की तरह ट्रीट किए जाने का खतरा बढ़ेगा।

सतर्क रहें

यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर लंबे समय तक बिना हरकत के खड़ा रहे, बेहद सुस्त हो, प्रतिक्रिया न दे या असामान्य व्यवहार करे तो उसे सिर्फ संदिग्ध मानना खतरनाक हो सकता है। ऐसे मामलों में चिकित्सा मदद और काउंसलिंग जरूरी हो सकती है। आमजन और पुलिस दोनों के लिए जरूरी है कि ऐसे संकेतों को समझें और संवेदनशील प्रतिक्रिया दें।
डॉ. महेंद्र सोनी, एसोसिएट प्रोफेसर, एनएलयू, जोधपुर

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Updated on:
06 Apr 2026 11:25 am
Published on:
06 Apr 2026 11:24 am
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