
जोधपुर।
पुराने कबाड़ को बेकार मानकर उनकों फेंकने का दौर अब पुराना हो गया है। वर्तमान में पुराने कबाड़ को क्रिएटिविटी से उनको आकर्षक उत्पाद बनाने का काम भी जोरों पर चल रहा है। कबाड़ से जुगाड़ की थीम पर बने उत्पाद आज विभिन्न देशों में निर्यात किए जा रहे है। शहर में यह काम कई उद्यमी कर रहे है। इन्हीं में एक है युवा उद्यमी और निर्यातक अजय शर्मा, जो पुरानी कबाड़ और बेकार हो चुकी चीजों को रीसाइकिल करने का काम कर रहे है। हाल ही में अजय ने कबाड़ से दो चरखें बनाए है, जो रावण का चबूतरा मैदान पर लगे हस्तशिल्प उत्सव में आकर्षण का केन्द्र बने हुए है।
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15 फीट ऊंचा व 25 फीट लंबा चरखा
हस्तशिल्प उत्सव में लकड़ी का एक बड़ा चरखा बनाया गया है। जिसकी डिजाइन लोगों के लिए आकर्षण बनी हुई है। यह चरखा 15 फीट ऊंचा व 25 फीट लंबा है। यह चरखा लकड़ी के भारी ल_ों से तैयार किया गया है। पूर्ण रूप देने के लिए इसमें 1 इंच की मोटी सफेद रस्सी लगाई गई है।
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चरखा चलने पर भजन सुनाई देता है
‘चरखा क्रांति से आइटी क्रांति तक भारत कदम दर कदम ’ की थीम पर बनाया गया है। जो आधे हॉर्स पावर की मोटर से चलता है। इस चरखे के चलने पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भजन ‘वैष्णव जन हम तेने कहिए’ भी सुनाई देता है।
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बियरिंग्स व हथोड़ी से बनाए गांधीजी के बंदर
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के तीन बंदर भी कबाड़ से बनाए गए है। बियरिंग्स, प्लास, पाने व हथोड़ी को जोडकऱ बनाए गए है। जिनके अंदर लाइट भी दी गई है। वजन में भी यह बंदर भारी है।