राजस्थान हाईकोर्ट ने 43 साल बाद CRPF कांस्टेबल के परिवार को पेंशन जारी करने का आदेश दिया है, जिससे स्पष्ट हुआ कि सेवा के दौरान बीमारी के कारण हटाए गए कर्मचारियों को भी पेंशन का पूरा अधिकार है। यह फैसला राज्य के पेंशनधारियों के हित में है और भविष्य में कर्मचारियों के पेंशन अधिकार निश्चित करेगा।
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने 43 साल बाद एक बेहद महत्त्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के पेंशन संबंधी अधिकारों से जुड़ा हुआ है। फैसले के अनुसार यदि कोई कर्मचारी चिकित्सा कारणों के चलते समय से पहले सेवामुक्त कर दिया जाता है तो भी उसे और उसके परिवार को पेंशन पाने का पूरा हक है।
CRPF कांस्टेबल भागीरथ सिंह चिकित्सा परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 1 सितंबर 1964 को नियुक्त किए गए। भर्ती के समय वह स्वस्थ थे। लेकिन 1973 में “क्रोनिक ब्रोंकाइटिस” बीमारी की वजह से निलंबित कर सेवा से बाहर कर दिया गया था। यह बीमारी उन्हें सेवा के दौरान हुई थी, तब तक उन्होंने 10 साल की अनिवार्य सेवा पूरी नहीं की थी। इसलिए केंद्र सरकार ने पेंशन देने से इनकार कर दिया।
न्यायालय ने पेंशन नियम 1972 के नियम 49(2) के तहत कहा कि 10 साल की न्यूनतम सेवा का नियम बीमारी के कारण हटाए गए कर्मचारियों पर लागू नहीं होता। इससे यह स्पष्ट होता है कि पेंशन पाने का अधिकार केवल सेवा की अवधि से नहीं, बल्कि हटाए गए कारणों पर भी निर्भर करता है। अदालत ने केंद्र सरकार को दो महीने के भीतर पेंशन की धनराशि भागीरथ सिंह के परिवार को जारी करने का निर्देश दिया है।
यह फैसला बताता है कि सरकारी कर्मचारी अगर किसी चिकित्सीय कारणों के चलते सेवा से हटाए जाते हैं, तो भी उन्हें पेंशन पाने का अधिकार है। लंबे समय तक पेंशन के लिए संघर्ष करना पड़े तो भी न्यायालय ऐसे मामलों में कर्मचारियों के अधिकार का समर्थन करेगा। ऐसे फैसले से कर्मचारियों को भविष्य में अपने पेंशन के लिए न्यायालय में प्रयास करने में मदद मिलेगी।