
जोधपुर. अखंड सौभाग्य, सुख समृद्धि की कामना से जुड़ा करवा चौथ पर्व जोधपुर में 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा। सुहागिनें मिट्टी के सुराहीनुमा पात्र करवां से चांद को अघ्र्य दे कर पति के हाथों जल आचमन कर व्रत का पारणा करेंगी। शादी के बाद पहली बार करवां चौथ पर्व मनाने वाली नवविवाहित महिलाओं में विशेष उत्साह है। व्रती महिलाएं सूरज डूबने के बाद मां गौरी का पूजन कर चन्द्रोदय होने तक बुजुर्ग महिलाओं से करवां चौथ से जुड़ी पौराणिक कथाएं सुनेंगी। पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि मौसम अनुकूल रहने पर जोधपुर में रात 10.28 बजे चंद्रोदय होगा।
करवां चौथ व्रत में छलनी का महत्व
करवा चौथ के व्रत में छलनी का बेहद महत्व है. इस दिन पूजा की थाली में महिलाएं सभी सामानों के साथ-साथ छलनी भी रखती हैं। करवा चौथ की रात महिलाएं अपना व्रत पति को इसी छलनी में से देखकर पूरा करती हैं। शादी-शुदा महिलाएं इस छलनी में पहले दीपक रख कर चांद देखती हैं और फिर अपने पति को निहारती हैं। इसके बाद पति उन्हें पानी पिला कर व्रत पूरा करवाते हैं, लेकिन कभी सोचा है पति और चांद दोनों को छलनी से ही क्यों देखा जाता है? इसके पीछे की आखिर
वजह क्या है?
चांद और पति को इसीलिए देखती हैं छलनी से
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक चंद्रमा को भगवान ब्रह्मा का रूप माना जाता है और चांद को लंबी आयु का वरदान मिला हुआ है। चांद में सुंदरता, शीतलता, प्रेम, प्रसिद्धि और लंबी आयु जैसे गुण पाए जाते हैं। इसीलिए सभी महिलाएं चांद देख कर ये कामना करती हैं कि ये सभी गुण उनके पति में आ जाएं।
छलनी की पौराणिक कथा
वहीं, छलनी को लेकर एक और पौराणिक कथा के मुताबिक एक साहूकार के सात लड़के और एक बेटी थे। बेटी ने अपने पति की लंबी आयु के लिए करवां चौथ का व्रत रखा था। रात को जब सभी भाई भोजन करने लगे तो उन्होंने अपनी बहन को भी खाने के लिए आंमत्रित किया, लेकिन बहन ने कहा-भाई! अभी चांद नहीं निकला है, चांद निकलने पर उसे अघ्र्य दे कर भोजन करूंगी। बहन की यह बात सुन कर भाइयों ने बहन को खाना खिलाने की योजना बनाई।