जोधपुर

अब जीरा नहीं रहेगा जीव का बैरी, राजस्थान की कृषि में 2021 में बड़े बदलाव की उम्मीद

- काजरी ने जीरे की 100 दिन में पैदा होने वाली वैरायटी खोजी-मौसम की मार व कीड़े पडऩे से पहले कट जाएगी जीरे की फसल
2 min read
Jan 06, 2021
अब जीरा नहीं रहेगा जीव का बैरी, राजस्थान की कृषि में 2021 में बड़े बदलाव की उम्मीद
अब जीरा नहीं रहेगा जीव का बैरी, राजस्थान की कृषि में 2021 में बड़े बदलाव की उम्मीद

गजेन्द्र सिंह दहिया/जोधपुर. इस साल प्रदेश की कृषि में क्रांति हो सकती है। किसानों के लिए जीरे की एेसी वैरायटी सामने आई है जो ४० दिन पहले ही पक जाती है। मौसम की मार व कीड़ा लगने से पहले ही जीरा बाजार में होगा। देश में सर्वाधिक जीरा राजस्थान में होता है और देश से निर्यात होने वाले मसालों में जीरा दूसरे स्थान पर है। यह वैरायटी केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के वैज्ञानिकों की तीन साल की अथक मेहनत का परिणाम है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) से हरी झंडी मिलते ही इस वैरायटी के बीज किसानों को उपलब्ध होंगे।

गौरतलब है कि जीरा जरा से बादल देखकर बिगड़ जाता है। इस कारण राजस्थानी किसानों ने ‘जीरा जीव का बैरी रे’ कहावत ही बना डाली, लेकिन अब यह कहावत इतिहास के पन्नों में ही रह जाएगी।

काजरी ने बनाई सीजेडसी-९४
काजरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ आरके कांकाणी ने बताया कि वर्तमान में देश के ७० प्रतिशत किसान गुजरात द्वारा विकसित जीरे की जीसी-४ वैरायटी उगाते हैं। काजरी ने इसमें प्राकृतिक उत्परिवर्तन करवाकर सीजेडसी-९४ वैरायटी विकसित की है। जीसी-४ को पकने में १४० दिन लगते हैं जबकि सीजेडसी-९४ सौ दिन में ही तैयार हो जाती है। नई वैरायटी के फूल ७० की जगह ४० दिन में आ जाते हैं। काजरी ने लगातार ३ साल तक इसके परीक्षण किए हैं।

इसलिए कहा जाता है जीरा जीव का बैरी
- बीज के अंकुरण के साथ उकता रोग से चकते बनकर पौधा खत्म।
- रताला रोग में लाल होकर मर जाता है।
- बादलों के कारण काला रोग।
- फरवरी के अंत में काला कीड़ा माऊ (एपिड) लग जाता है तब जीरे में फूल से फल आ रहा होता है। नई वैरायटी में तब तक फल बन चुका होगा।

सरकार व आम आदमी के लिए जीरा इसलिए महत्वपूर्ण
- देश में सर्वाधिक निर्यात लाल मिर्च होती है। उसके बाद जीरे का नम्बर आता है।
- निर्यात होने वाले मसालों में १५ प्रतिशत जीरा है।
- वर्ष २०१९-२० में २.१० लाख मैट्रिक टन जीरा निर्यात हुआ। इसकी कीमत ३२२५ करोड़ थी। (स्त्रोत: भारतीय मसाला बोर्ड)

‘हमने तीन साल तक इसके परिणाम देखें हैं जो उत्साहित करने वाले हैं। इससे प्रदेश की कृषि में बदलाव आएगा।’
- डॉ ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर

Published on:
06 Jan 2021 08:05 pm