जोधपुर

International Literacy Day पर जानिए किड्स को साक्षर करने का जुनून और जज्बा

जोधप़ुर.आज अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस ( International Literacy Day ) है और साक्षरता दिवस ( Literacy Day ) पर पत्रिका आपको बता रहा है कि जोधपुर शहर में कुछ एेसे लोग भी हैं जो बिना किसी सरकारी मदद के गरीब निरक्षर ( Illiterate ) बच्चों को पढ़ा कर उन्हें साक्षर ( Literate ) कर रहे हैं।                    
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Sep 08, 2019
Know the passion to make kids literate on International Literacy Day
Know the passion to make kids literate on International Literacy Day

पत्रिका एक्सक्लूसिव
एम आई जाहिर/ जोधपुर.अगर इन्सान खुद कुछ करना चाहे तो बिना सरकारी मदद के भी कर सकता है, बस जज्बा और जुनून चाहिए। सरकार तो निरक्षरों को साक्षर करना भूल गई, लेकिन मारवाड़ ने पढऩे और पढ़ाने की परंपरा को कायम रखा है। जोधपुर शहर और गांव में कुछ एेसे लोग व संस्थाएं भी हैं जो थार और विशेषकर जोधपुर में अपना कीमती वक्त निकाल कर निरक्षरों को साक्षर कर रहे हैं। आज अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस ( International Literacy Day ) है और साक्षरता दिवस ( Literacy Day ) पर पत्रिका आपको बता रहा है कि जोधपुर शहर में कुछ एेसे लोग भी हैं जो बिना किसी सरकारी मदद के गरीब निरक्षर ( Illiterate ) बच्चों को पढ़ा कर उन्हें साक्षर ( Literate ) कर रहे हैं। ये एेसे लोग हैं जो लोगों को साक्षर देखना चाहते हैं-

सीख रहे ककहरा, बन रहे साक्षर : ग्राविस की अनूठी पहल
जोधपुर की स्वयंसेवी संस्था ग्र्रामीण विकास विज्ञान समिति ( Gramin vikas vigyan samiti ) में कुछ हट कर करने का जज्बा है। संस्था ने थार मरुस्थल के ग्रमीण समुदायों के एकीकृत विकास के लिए समर्पित है। शिक्षा व साक्षरता के क्षेत्र में संस्था पश्चिमी राजस्थान में 21 प्राथमिक विद्यालयों का संचालन और आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। ये विद्यालय जोधपुर के ओसियां, बाप और फ लोदी ब्लॉक, बीकानेर के कोलायत ब्लॉक व जैसलमेर के सांकड़ा ब्लॉक में चल रहे है। इन विद्यालयों में 2500 छात्र छात्राएंं कक्षा1 से 4 तक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ये स्कूल गांव की आबादी से दूर ढाणियों में संचालित हो रहे हैं, इससे ढाणियों में रहने वाले बच्चों को लाभ प्राप्त हो रहा है। ग्राविस सचिव शशि त्यागी ( Shashi Tyagi ) ने बताया कि संस्था ने एक प्राथमिक विद्यालय उत्तराखंड के गढ़वाल जिले में भी शुरू किया है। वे कहती हैं शिक्षा गरीबों का भी हक है और यह हक तो उन्हें मिलना ही चाहिए। संस्था इसी जज्बे से बच्चों को पढ़ाती रहेगी।

गरीब बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया : जिओ क्लब का पैशन
जोधपुर के बासनी सैकंड फेज हड्डी मिल की गरीब बस्ती के ये बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। कुछ बच्चे गाडि़यां साफ करते हैं तो कुछ बच्चे सफाई करते हैं। जिओ क्लब इंटरनेशनल ( Geo club international ) ने इन्हें पढ़ाने का बीड़ा उठाया और सामुदायिक भवन में 60 से 70 बच्चे पढऩे के लिए आते हैं। कुछ बच्चे कुछ दिन आते हैं और फिर रोजी रोटी के जुगाड़ और थकान के कारण नहीं आते तो संस्था उन्हें फिर से प्रेरित करती है तो वे आने लगते हैं। पढ़ाने के बाद करीब 90 बच्चों को राजकीय प्रवेशिका प्राथमिक संस्कृत विद्यालय कुड़ी भगतासनी सैक्टर 1 स्कूल में प्रवेश दिलवाया गया है। साथ ही उनके लिए पढऩे की सामग्री का इंतजाम भी किया गया है। जिओ क्लब की फाउंडर और प्रेसीडेंट अपर्णा मोदी ( Aparna Modi ) ने बताया कि पहले वे शास्त्रीनगर में पढ़ाते थे और अब यह बस्ती चुनी है। उनके साथ लक्ष्मणसिंह आर्य,चिराग, अली,अंकिता, भुवनेश माथुर, अभिनव पारख, अर्पणा मेड़तिया और आयुषी इन बच्चों को पढ़ाते हैं।

Published on:
08 Sept 2019 03:56 pm