
महेश कुमार सोनी
फलोदी. वैसे रेगिस्तान के तपते धोंरों पर तो विदेशी क्या देशी अनुकूलित पक्षियों के भी हाल-बेहाल हो जाते हैं, लेकिन इस धरती ने मंगोलिया, कजाकिस्तान, चीन में रहने वाले मेहमान पक्षियों को इस कदर आकर्षित किया है कि ये पक्षी सालों से अपने शीतकालीन प्रवास पर यहां पहुंचते हैं।
कुरजां पक्षियों के इस जमीन से रिश्ते इतने गहरे हो गए है कि अब इनकी तादाद यहां बढऩे लगी है। वहीं दूसरी कई अन्य प्रवासी पक्षियों भी यहां आने लगे है। दक्षिणी भू-भाग में डेमोसाइल कै्रन के नाम से विख्यात कुरजां पक्षियों ने खीचन में पर्यटन की अपार संभावनाएं भी दिखाई है।
यूं जुड़ा इस जमीन से रिश्ता
पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि कुरजां के मूल स्थानों पर बर्फबारी के कारण उनके लिए भोजन की विकट परिस्थितियों उत्पन्न हो जाती है तथा ये पक्षी भोजन के लिए सुरक्षित स्थानों की तरफ उड़ान भर लेते हैं। कुरजां संभवतया शुरूआती दौर में अपने मूल स्थानों के आस-पास के क्षेत्रों में ही प्रवास करती थी, लेकिन वहां पक्षियों पर किसी खतरे की आहट से धीरे-धीरे शीतकालीन प्रवास स्थलों की दूरी बढ़ती गई और कुरजां अब करीब 5500 किमी का सफर तय कर यहां आ रही है। कुरजां यहां पंहुच कर खुद को महफूज महसूस कर रही है।
6 माह का होता है प्रवास
मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान से प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां सितम्बर माह में यहां पहुंचते है तथा फरवरी तक शीतकालीन प्रवास कर मार्च माह में वतन वापसी की उड़ान भरते हैं। शीतकालीन प्रवास के दौरान कुरजां फलोदी के निकट नमक उत्पादन क्षेत्र के मैदानों में रात्रि विश्राम कर सुबह खीचन में पक्षी चुग्गाघर व दोपहर में तालाबों पर विचरण करती है। पक्षी प्रेमी सेवाराम माली ने बताया कि इन दिनों खीचन में करीब ५ हजार पक्षी पहुंच चुके हैं। अगले कुछ दिनों में दिन के तापमान में गिरावट के साथ ही कुरजां की संख्या में इजाफा होगा।
पर्यटन की दिखाई संभावनाएं
खीचन में हजारों की तादाद में कुरजां का स्वच्छंद विचरण यहां आने वाले देशी-विदेशी सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। यहां कुरजां को देखने के लिए प्रतिवर्ष हजारों सैलानी पंहुचते है और कुरजां की मनमोहक अठखेलियां देखकर अभिभूत हो उठते हैं।
अक्टूबर माह में कुरजां की संख्या
तारीख कुरजां की संख्या
05.10.13 200
05.10.14 3000
05.10.15 500
05.10.16 1500
05.10.17 4000
05.10.18 5000