
जोधपुर।
राज्य सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में प्रदेश के खान मजदूरों के कल्याण के लिए किए गए वादे के आखिर करीब तीन साल बाद 16 मई 2022 को खान मजदूर कल्याण बोर्ड का गठन किया। लेकिन अभी तक यह बोर्ड धरातल पर नहीं आया है। इसकी वजह यह है कि प्रदेश के करीब 25 लाख खान मजदूर खान व श्रम विभाग के बीच अटक गए है। जहां, श्रम, कारखाना, बॉयलर व ईएसआई विभाग की ओर से खान मजदूर कल्याण बोर्ड के गठन का नोटिस जारी किया गया, वहीं अब विभाग कह रहा है कि यह हमारे दायरे में नहीं आते। इस वजह से कुछ दिनों बाद घोषित होने वाले राज्य बजट में खान मजदूरों के कल्याण के लिए प्रस्ताव भी नहीं भेजा जा सका है। इससे खान मजदूरों के कल्याण की उम्मीदें धूमिल होती नजर आ रही है।खान मजदूर न सिर्फ आजिविका का बल्कि राज्य के राजस्व का भी एक बहुत बड़ा हिस्सा है। इसके बावजूद खान मजदूरों के कल्याण पर अर्जित आय का नगण्य हिस्सा ही व्यय किया जाता है। इससे खान मजदूर बदहाली व दयनीय जीवन जीने को मजबूर है।
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बजट से उम्मीदें
खान मजदूरों को जहां बजट के लिए प्रस्ताव नहीं भेजे जाने से निराशा हुई है। वहीं, वे अब इस बजट से बोर्ड के लिए नए बजट घोषणा की आस लगाए बैठे है।
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बोर्ड धरातल पर होने से यह फायदा मिलेगा
- बोर्ड बनने से मजदूर पंजीकृत होंगे, मजदूर व श्रमिक के रूप में पहचान मिलेगी।
- पेंशन व अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
- खान अधिनियम 1952 में खान मजदूरों के कल्याण का प्रावधान है, वे सभी पंजीकृत मजदूरों को मिलेंगे।
- सरकार की ओर से बनाए गए डीएमएफटी फण्ड का लाभ मिलेगा।
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खान मजदूर दो विभागों के बीच अटक गए है। सरकार से प्रदेशभर में कलेक्ट होने वाली रॉयल्टी से एक प्रतिशत बोर्ड व खान मजदूरों के कल्याण के लिए अथवा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड में से 50 प्रतिशत बोर्ड के लिए आवंटन का आग्रह किया है।
जगदीशराज श्रीमाली, उपाध्यक्ष
राजस्थान श्रम कल्याण बोर्ड (राज्यमंत्री)
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खान मजदूर खान विभाग के अन्तर्गत आते है। बजट प्रस्ताव भेजने का काम वह विभाग ही करेगा।
विकास भाले, प्रिंसिपल सैक्रेटरी
श्रम, कारखाना, बॉयलर व ईएसआई विभाग
जयपुर
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बिना बजट प्रावधान के बोर्ड का अस्तित्व मात्र कागज में सिमटकर रह जाएगा। आगामी राज्य बजट में खान श्रमिक कल्याण बोर्ड के लिए बजट प्रावधान की पुरजोर मांग की गई है।
डॉ राना सेनगुप्ता, प्रबंध न्यासी
खान मजदूर सुरक्षा अभियान ट्रस्ट
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