
जोधपुर।
राजस्थान के प्रसिद्ध पहनावे में से एक लहरिया को पूरे देश में पसंद किया जाता है। सावन मास में तीज, हरियाली अमावस्या और कई अन्य पर्वो पर महिलाएं लहरिया पहनना पसंद करती है। रंगों, डिजाइन व कपड़े की गुणवत्ता के कारण जोधपुर के लहरिया परिधानों की देशभर में भारी डिमाण्ड रहती है और लहरिया परिधानों का गढ़ होने के कारण यहां से देश-विदेशों में सप्लाई होता है। जोधपुर में सावन माह में लहरिया परिधानों का करीब 100 करोड़ रुपयों का कारोबार होता है। वहीं कोरोना संक्रमण के बीच सावन के तीज त्यौहार मनाने वाली महिलाओं ने भी पूरी तैयारी कर रखी है।
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पसंद के हिसाब से बदल रहा बाजार का ट्रेंड
तीज और सिंजारा पर महिलाएं नववधुओं के लिए लहरिया लेकर उनके घर जाती है। बाजारों में महिलाओं को पसंद के अनुरूप तरह-तरह के रंगों में लहिरया लुभा रहे है। इसे देखते हुए व्यापारियों ने महिलाओं के लिए खास तरह के लहरियां मंगवाए है। इस महीने का उत्साह फैशन की गलियों में अभी से ट्रेंड कर रहा है।
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राजाशाही, भोपालशाही सहित कई डिजाइनें बाजार में
त्रिपोलिया बाजार मोती चौक व्यापार संघ के अध्यक्ष दीपक सोनी ने बताया कि कपड़ा मार्केट में पूरे सावन माह में लहरिया की विशेष डिमाण्ड है। लहरिया में भोपालशाही, राजाशाही, समधर लहरिया, वसुन्धरा, पट्टा लहरिया, शेडेड लहरिया, जीरो हंड्रेड लहरिया, मोठड़ा लहरिया, सतरंगी लहरिया की आकर्षक डिजाइनें है। जिनकी साडिय़ां, राजपूती सूट, लहंगा-चुन्नी, दुपट्टा-साफा आदि में लहरियां की डिमाण्ड बनी हुई है।
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ग्रीन के लाइट और डार्क शेड का हर उम्र मेंं क्रेज
व्यापारी दानमल जैन के अनुसार सावन में महिलाएं जहां हरे रंग के शेड्स की साडियां पसंद कर रही है तो वहीं युवतियां लाइट शेड जैसे लाइम, ग्रीन, ओलिव ग्रीन, एमेरल्ड ग्रीन की डिमाण्ड कर रही है। सतरंगी लहरिया में गोटा पट्टी और मल्टीकलर वर्क काफी पसंद किया जा रहा है। रक्षाबंधन जैसे पर्व के लिए महिलाएं बंधेज में लेस वर्क की साडियां और लहंगे की डिमाण्ड कर रही है। सावन की इस बार के फैशन में लाइट और डार्क शेड्स के साथ लहरिया भी फैशन में है। हैण्डलूम में प्योर सिल्क, चंदेरी भी लहरिया स्टाइल का चलन ज्यादा है। डोरिया के लहरिया की डिमाण्ड सबसे ज्यादा है।